बरेली: ये जादू सिर्फ अफसर जानते हैं... खाली हाथ किसान फिर भी खरीदा धान
महीने भर से क्रय केंद्रों पर सन्नाटा होने के बावजूद जिले में 60 फीसदी से 96 फीसदी पर पहुंच गई धान की सरकारी खरीद
बरेली, अमृत विचार। तमाम विवादों और शिकायतों के बीच एक महीने से ज्यादा वक्त से सूने पड़े धान क्रय केंद्रों पर अफसरों ने वह कर दिखाया जो धान की सबसे ज्यादा आवक के दौरान भी नहीं हो पाया। नवंबर के आखिरी सप्ताह से ही क्रय केंद्रों पर धान के साथ किसानों की आमद बंद हो गई थी लेकिन इसके बावजूद हाल के कुछ दिनों में धान की सरकारी खरीद ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि जो लक्ष्य पिछले महीने 60 फीसदी पर अटका हुआ था, वह सीधे 96 फीसदी पर जा पहुंचा।
इस जादूई खरीद ने एक झटके में अफसरों का सारा तनाव दूर कर दिया है। अब वे दावा कर रहे हैं कि खरीद बंद होने से पहले आसानी से लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। पिछले साल के मुकाबले इस बार समय से पहले लक्ष्य पूरा करने को अफसर शुभ संकेत भी बता रहे हैं। हालांकि शुरू से अब तक अलग-अलग अंतराल में धान की खरीद के आंकड़े खुद सारी कहानी बयान कर रहे हैं, लेकिन न कोई इसे सुनना चाहता है न धान खरीद में पारदर्शिता रखने के लिए जिम्मेदार अफसरों से जवाब लेने के लिए कोई तैयार है।
इस बार 1.82 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य लेकर धान खरीद एक अक्टूबर 2022 को शुरू हुई थी। सरकार ने समर्थन मूल्य 2040 रुपये घोषित किया लेकिन खरीद शुरू होने से कुछ दिन पहले ही किसानों पर जमकर कुदरत का कहर बरसा। बारिश से खेतों में पानी भरने से धान की कटी पड़ी फसल बर्बाद हो गई। बहेड़ी और नवाबगंज क्षेत्र में तो बाढ़ जैसे हालात हो गए। बचीखुची उपज लेकर किसान केंद्रों तक पहुंचे तो नमी जैसी खामियां बताकर टालमटोल की जानी लगी। मायूस किसानों ने इस पर कम कीमत पर ही अपना धान बिचौलियों को बेच दिया।
बहेड़ी और नवाबगंज में आढ़तों और राइस मिलर्स ने जमकर सीधी खरीद की। इस वजह से सरकारी खरीद तहसनहस हो गई। दिसंबर के पहले सप्ताह में खरीद का आंकड़ा 60 फीसदी पर पहुंचने के साथ आवक लगभग बंद हो गई तो अफसरों का तनाव बढ़ा लेकिन हाल के कुछ दिनों में रहस्यमय ढंग से खरीद ऐसी ने तेजी पकड़ी कि अफसर लक्ष्य के करीब पहुंच गए। खरीद का आंकड़ा 18 जनवरी तक 96 प्रतिशत पहुंच गया।
आढ़तियों और सत्तापरस्त लोगों ने हथियाए तमाम केंद्र
धान खरीद 31 जनवरी तक होनी है लिहाजा 11 दिन बाकी है। बताया जाता है कि इस बार कई धान क्रय केंद्र सत्ताधारियों ने हासिल किए तो तमाम केंद्र आढ़तियों ने भरोसेमंद लोगों के नाम पर हथिया लिए। इसी कारण केंद्रों पर खरीद की रफ्तार और फर्जीवाड़े की शिकायतों का ढेर लग गया। इसके बाद कमिश्नर संयुक्ता समद्यार ने नरियावल स्थित मंडी में धान खरीद में फर्जीवाड़ा पकड़ने के बाद थाना बिथरी में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, लेकिन खेल फिर भी जारी रहा।
अमृत विचार ने उजागर किया था धान खरीद का सच
धान क्रय केंद्रों पर मुस्तैदी, पारदर्शिता और बिचौलियों पर अंकुश लगाने के तमाम दावे खरीद शुरू होने से पहले किए गए थे जिनकी खरीद शुरू होते ही धज्जियां उड़ने लगीं। शहर की नवीन गल्ला मंडी, नवाबगंज समेत कई मंडियों में केंद्रों पर किसान नाममात्र के लिए ही पहुंचे। अमृत विचार की टीम ने जब इस दौरान क्रय केंद्रों का जायजा लिया तो इक्का-दुक्का किसानों का ही धान तुलता पाया था। ज्यादातर केंद्र प्रभारियों का एक ही जवाब था कि बारिश की वजह से धान को काफी नुकसान पहुंचा है। बचा धान किसान बेच चुके हैं। इस वक्त खरीद का आंकड़ा 50 फीसदी तक भी नहीं पहुंचा था।
नियमों की धज्जियां उड़ाती रहीं राइस मिलें
नियमानुसार मंडी से आठ किलोमीटर के दायरे में सीधी खरीद नहीं की जा सकती लेकिन इस बार मंडियों से तीन से चार किलोमीटर के दायरे में ही राइस मिलों पर बेरोकटोक ढंग से जमकर सीधी खरीद की गई। नवाबगंज और बहेड़ी इलाके में यह खेल खुलकर चला। यहां धान में नमी की बात कहकर 600 रुपये क्विंटल तक की कटौती किसानों से की गई। माना जा रहा है कि राइस मिलों की बदौलत धान खरीद का लक्ष्य पूरा करने में काफी मदद मिली।
फैक्ट फाइल
लक्ष्य : 183000 एमटी
खरीद : 176970.31 एमटी
प्रतिशत : 96.71
मिल को प्रेषित धान : 174211.27 एमटी
केंद्र पर शेष : 2759.04 एमटी
लाभान्वित किसान: 26596
किसानों को भेजा गया भुगतान : 330951.03 लाख
अवशेष भुगतान : 3006.92 लाख
नोट- आंकड़ा 18 जनवरी तक की खरीद के अनुसार
धान खरीद पारदर्शिता के साथ चल रही है। जहां-जहां गड़बड़ियां सामने आईं, वहां कार्रवाई की गई। जिले में धान खरीद का आंकड़ा 96 फीसदी पार कर चुका है। किसानों के भुगतान और सीएमआर एफसीआई तक पहुंचाने में गंभीरता बरती जा रही है। किसानों का बकाया भुगतान भी जल्द होगा--- कमलेश कुमार, डिप्टी आरएमओ।
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