आदर्श राज्य की परिकल्पना

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Edited By Amrit Vichar
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भारत में सभी की धार्मिक आस्थाओं के आराधना स्थलों के लिए पर्याप्त जगह और उसकी चिंतन प्रणाली के लिए भरपूर सम्मान रहा है। राम मंदिर का शिलान्यास जिन परिस्थितियों तथा तरीकों से हुआ है वह आने वाले समय में राजनैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्तरों पर बहस के नए रास्ते तो खोलेगा ही, यह भी देखना …

भारत में सभी की धार्मिक आस्थाओं के आराधना स्थलों के लिए पर्याप्त जगह और उसकी चिंतन प्रणाली के लिए भरपूर सम्मान रहा है। राम मंदिर का शिलान्यास जिन परिस्थितियों तथा तरीकों से हुआ है वह आने वाले समय में राजनैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्तरों पर बहस के नए रास्ते तो खोलेगा ही, यह भी देखना होगा कि क्या देश गांधी के रामराज्य की स्थापना की ओर कदम बढ़ाएगा जिसका दावा हर राजनैतिक दल और शासन प्रमुख करते आए हैं। लगभग 30 साल पहले प्रारंभ हुआ राम जन्मभूमि आंदोलन अपनी पूर्णता पर पहुंच गया है परंतु यह तय है कि इसका राजनैतिक लाभ लिया जाता रहेगा। ऐसे समय में जब अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है, हमें गांधी की धर्म संबंधी अवधारणाओं को याद रखना चाहिए। आज हमारी राजनीति धार्मिक होने का सर्वाधिक दिखावा करती है लेकिन वही सर्वाधिक अमानवीय है।

राम मंदिर को लेकर पिछले लगभग 500 वर्षों से संघर्ष का इतिहास रहा है। साथ ही गुजरात के सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण एक नजीर के रूप में हमारे सामने मौजूद है। सोमनाथ मंदिर निर्माण की खास बात यह थी कि उसमें कोई सरकारी मदद नहीं ली गई थी और उसका भूमिपूजन व लोकार्पण तत्कालीन प्रधानमंत्री नहीं बल्कि राष्ट्रपति ने किया था जो देश की सांस्कृतिक विविधता के प्रतिनिधि होते हैं। क्या ही अच्छा होता कि परंपराओं के मुताबिक इसका भूमि पूजन हमारे राष्ट्रपति करते जो हमारी विविधता के प्रतिनिधि हैं।आखिरकार राम सामाजिक समन्वय के सबसे बड़े राजदूत ही तो थे।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने संस्कृति के चार अध्याय में महात्मा गांधी के धर्म संबंधी विचारों की विस्तार से व्याख्या की है। वे बतलाते हैं कि स्वयं गांधीजी कहते थे-मेरा उद्देश्य धार्मिक है, किन्तु मानवता से एकाकार हुए बिना मैं धर्म-पालन का मार्ग नहीं देखता। इसी कार्य के लिए मैंने राजनीति का क्षेत्र चुना है, क्योंकि इस क्षेत्र में मनुष्यों से एकाकार होने की संभावना है। आज गांधी और राम को पूजने का ढोंग करने वाले स्वयं को टटोलें कि वे ईश्वर के उपासक होने का दावा तो कर रहे हैं लेकिन क्या उनके दिल में वाकई सत्य बसता है? क्या वे सदाचार और प्रेम के करीब भी हैं? आज के शासक जब धार्मिकता का खुले आम उपयोग कर रहे हैं, बापू से धर्मनिष्ठता का पाठ हमें सीखना होगा। देश में स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व पर आधारित रामराज्य स्थापित हो- जो गांधीजी के आदर्श राज्य की परिकल्पना थी।