इसलिए मियां-बीवी के झगड़े... ये फोन नहीं छोड़तीं और वो शराब

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Edited By Amrit Vichar
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महिला थाने में वर्ष 2022 में आए करीब तीन सौ पारिवारिक मामलों काे पुलिस ने किया श्रेणीबद्ध, 280 मामलों में कराया समझौता

बरेली, अमृत विचार। मामूली विवाद जिन्हें आपसी समझदारी से सुलझाया जा सकता है, वे भी मियां-बीवी के अड़ियलपन की वजह से दांपत्य जीवन में दरार डालने की वजह बन रहे हैं। महिला थाने में साल 2022 में आए करीब 300 पारिवारिक मामलों का विश्लेषण यही बता रहा है। इनमें से सर्वाधिक 50 फीसदी मामलों में तो पतियों की घर खर्च के लिए पैसे न देने पर बीवियों से ठनी थी लेकिन 20 फीसदी झगड़े पतियों की शराब पीने की आदत और 15 फीसदी बीवियों के फोन पर व्यस्त रहने की वजह से घर के कामकाज भूल जाने की वजह से हुए थे।

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महिला पुलिस ने साल 2022 में आए सभी तीन सौ पारिवारिक विवाद के मामलों को श्रेणीबद्ध किया है। इनके मुताबिक घर चलाने के लिए पैसे न देने के तमाम मामलों बेरोजगारी भी वजह निकली। कई मामलों में पति की कमाई से अपने सपने पूरे न हो पाना बीवियों को खल गया और फिर दोनों में इस कदर ठन गई कि मामला थाने जा पहुंचा। मियां-बीवी के बीच बाकी सभी झगड़ों की वजह बेहद मामूली निकली। इनमें शराब पीने और फोन पर ज्यादा बातचीत करने के अलावा 10 फीसदी मामलों में पति-पत्नी में अलगाव की वजह सास और ननद के बहू के काम में नुक्स निकालने की निकली। बाकी पांच फीसदी मामलों में पति का पत्नी या पत्नी का पति पर अवैध संबंधों का शक झगड़े की वजह बना।
पुलिस के मुताबिक पति-पत्नी के बीच झगड़ों ने इसलिए भी तूल पकड़ा क्योंकि बदलते वक्त में अब पत्नियां ससुराल में बहुत ज्यादा समझौता करने को तैयार नहीं होतीं और पतियों के पास उन्हें खामोश करने के लिए मारपीट करना ही एकमात्र हथियार होता है। इसी कारण 20 मामलों में पुलिस काफी कोशिशों के बावजूद समझौता नहीं करा पाई। इन मामलों में रिपोर्ट दर्ज करनी पड़ी।

लंबा वक्त लगता है कोई घर उजड़ने से बचाने में
पुलिस के मुताबिक ज्यादातर मामले ऐसे होते हैं जिनमें समझाने-बुझाने का असर तुरंत होता है और पति-पत्नी अपना घर बिगड़ने से बचाने के लिए समझौता करके घर लौट जाते हैं। इसकी वजह यह भी होती है कि कई टकराव सिर्फ दूसरे लोगों के बहकावे में आकर शुरू होते हैं। ऐसे मामलों में सिर्फ मार्गदर्शन काफी होता है। कुछ मामले काफी पेचीदा होते हैं और उन्हें निपटाने में लंबा वक्त लग जाता है। साल 2022 में आए तीन सौ में से 20 मामले इसी श्रेणी के थे। काफी कोशिश के बावजूद पति-पत्नी के बीच समझौता नहीं हुआ तो मुकदमा दर्ज करना पड़ा। इन मामलों में पति-पत्नी एक-दूसरे से तलाक लेने पर अड़े रहे।

पारिवारिक विवाद के ज्यादातर मामले दांपत्य जीवन में दूसरों के दखल से शुरू होते हैं। इन मामलों में दोनों को जागरूक करने की कोशिश की जाती है। गंभीर मामलों में कई बार काउंसिंलिग कराकर समझौता करने की कोशिश पुलिस करती है---छवि सिंह, प्रभारी महिला थाना।

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