उम्मीद और चेतावनी 

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Edited By Amrit Vichar
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कोरोना महामारी की वजह से दर्ज की गई गिरावट, रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रतिकूल असर और महंगाई से उबरने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में अब सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिल रही है, जिससे यह वित्त वर्ष 2023 में विकास पथ पर अग्रसर हो रही है। भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2022-23 में मुद्रास्फीति के 6.8 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में ‘आर्थिक समीक्षा 2022-23’ पेश की। आर्थिक समीक्षा में कहा गया कि 6.8 प्रतिशत की महंगाई दर का अनुमान इतना ज्यादा नहीं है कि निजी उपभोग को रोक सके न ही यह इतना कम है कि निवेश में कमी आए। आर्थिक सर्वे देश की अर्थव्यवस्था का लेखा-जोखा होता है। इसके जरिए सरकार की योजनाओं की स्थिति, विकास का ट्रेंड, निवेश के बारे में पता चलता है। इस सर्वे के जरिए अनुमान लगाया जाता है कि कहां कितना नुकसान हुआ है और कहां कितना फायदा हुआ है।

कहा जा सकता है कि केंद्र सरकार की वित्तीय स्थिति काफी सुदृढ़ हो गई है जो कि आर्थिक गतिविधियां बढ़ने, प्रत्यक्ष करों एवं जीएसटी से होने वाले राजस्व में तेज उछाल और बजट में यथार्थवादी अनुमान लगाए जाने से ही संभव हो पाई है। गौरतलब है कि आरबीआई ने अप्रैल 2022 में अपनी मौद्रिक नीति को कठोर करना शुरू किया था और उस समय से लेकर अब तक कई बार रेपो रेट में वृद्धि की गई है जिससे अधिशेष तरलता में कमी आई है। 

भारत में 41.5 करोड़ लोग वर्ष 2005-06 और वर्ष 2019-20 के बीच गरीबी से उबर गए। भारत का महंगाई प्रबंधन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है, जो कि विकसित देशों की मौजूदा हालत के ठीक विपरीत है क्योंकि वे अब भी ऊंची महंगाई दर से जूझ रहे हैं। आने वाले समय में देश में रोजगार के मोर्चे पर तस्वीर बेहतर होगी। इससे खपत बढ़ेगी। सर्वे में सरकार ने ज्यादातर सकारात्मक उम्मीदें जगाई हैं लेकिन इसमें कई चेतावनियां भी दी गई हैं, जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकती है।

सर्वे में चेतावनी दी गई है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कमोडिटी की अस्थिर कीमतों और कच्चे माल की सप्लाई की रुकावटों के चलते वैश्विक स्तर पर नई बाधाएं देखने को मिल सकती हैं, जो हमारी औद्योगिक प्रगति पर दबाव डाल सकती हैं। साथ ही चीन मे कोरोना महामारी की वापसी से आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटें देखने को मिल सकती हैं। कुल मिलाकर आर्थिक सर्वे के आधार पर तय है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अगले दशक में निश्चित रूप से काफी तेज रफ्तार पकड़ लेगी।