भारत नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहा मजबूत, बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री महज छवि धूमिल करने का साधन

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एसएन सेन कालेज की विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग की डॉ. मनीषा दीवान का बीबीसी डॉक्यूमेंट्री पर लेख।

लेखक- डॉ. मनीषा दीवान विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग एसएन सेन कालेज, कानपुर

कानपुर। आजकल हम समाचार पत्रों में बीबीसी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी पर इंडिया:द मोदी क्वेश्चन नामक डॉक्यूमेंट्री के बारे में जोर- शोर से सुन रहे हैं। यह डॉक्यूमेंट्री टोनी ब्लेयर की सरकार में विदेश सचिव रहे एफ एस जेक स्ट्रा द्वारा ब्रिटिश विदेश मंत्रालय ने एक रिपोर्ट तैयार करवाई उस रिपोर्ट पर यह डॉक्यूमेंट्री आधारित है।

इस डॉक्यूमेंट्री के अनुसार सन 2002 में गुजरात के दंगों में 2000 मुसलमानों  की हत्या हुई इन हत्याओं के लिए यहां तक कहा गया कि गुजरात में जातीय नरसंहार हुआ व पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की इसके लिए गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदीजी को  जिम्मेदार माना गया भारत सरकार ने इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2021 के अनुसार इस डॉक्यूमेंट्री को प्रतिबंधित कर दिया गया फिर भी जेएनयू, हैदराबाद यूनिवर्सिटी, जादव यूनिवर्सिटी, तिरुवंतपुरम लॉ कॉलेज, जामिया मिल्लिया इस्लामिया,टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में छात्रों द्वारा इस डाक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग के समाचार आ रहे हैं।

करन थापर, एन राम एवं इन जैसे तथाकथित उदारवादी, बुद्धिजीवी वर्ग व संपूर्ण विपक्ष मोदी विरोधी मोर्चा खोल रहा है टी एम सी के डेरेक ओ ब्रायन ने इस डॉक्यूमेंट्री का लिंक दो बार शेयर किया प्रशांत भूषण भी लिंक शेयर कर रहे हैं टी एम सी की महुआ मोइत्रा मोदीजी पर निशाना साध रही है। एआईएमआई एम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवेसी ने गांधी- गोडसे एक युद्ध फिल्म को बैन करने की मांग कर दी है।

जबकि पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश एम पी इमरान हसन ने जब प्रधानमंत्री  ऋषि सुनक से जब इसके बारे में पूछा तो ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि हम किसी के चरित्र पर टिप्पणी नहीं करेंगे। अमेरिका ने भी इंस डॉक्यूमेंट्री का समर्थन नहीं किया अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेट प्राइस ने भी यह यही कहा कि"" उन्हें इस बाबत जानकारी नहीं है लेकिन भारत व अमेरिका लोकतांत्रिक मूल्यों से परिचित हैं"। ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड के सदस्य  लॉर्ड रामी रेंजर ने बुधवार को अपने ट्वीट में बीबीसी को आड़े हाथों लेते हुए बीबीसी पर पक्षपात रिपोर्टिंग का आरोप लगाया व भारत के करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत करने के लिए

बीबीसी की आलोचना की पाकिस्तानी कनाडा  मूल के पत्रकार तारिख फतेह के अनुसार मुसलमानों को मोदी जी से कोई शिकायत नहीं है यह उदारवादी हिंदू हैं जिन्हें मोदी जी से शिकायत है। उर्दू यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति जफर सरेशवाला ने इंडिया टी वी पर दिए गए अपने इंटरव्यू में कहा है कि जिन दस्तावेजों के आधार पर इस डॉक्यूमेंट्री को बनाया गया।

उस 2000 पन्नों की रिपोर्ट को उन्होंने भी पढ़ी है उसमें कुछ नया नहीं हैं। याद रहे यह वही जफर सरेशवाला हैं जिन्होंने उस समय हर मंच पर मोदी जी की आलोचना की थी इनके परिवार का भी इंटरव्यू इसमें लिया गया लेकिन वे यह भी कहते हैं कि मोदी जी ने दंगे नहीं करवाये।

अब सवाल यह आता है कि बीबीसी को दंगो के 20 साल बाद इस डॉक्यूमेंट्री को बनाने की क्या जरूरत पड़ गई इसे 2002- 2003 में ही क्यों नहीं दिखाया गया टुकड़े टुकड़े दल का इतना राजनैतिक पतन हो गया है कि अपने संकीर्ण राजनीति के चलते वह यह भी भूल गया कि भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम ने मोदी को क्लीन चिट दी थी।

 तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी कार्य काल में गठित जॉइंट पार्लियामेंट्री रिपोर्ट के अनुसार इन दंगों में 790 मुसलमान मरे व 240 हिंदू मरे। भारत में दंगों का इतिहास कोई नया नहीं है कांग्रेस के समय में  भारत में और गुजरात में मोदी जी के मुख्यमंत्री बनने से पहले क्या दंगे नहीं हुए?  फिर आज जब गुजरात और सारा देश प्रगति की राह की ओर अग्रसर है तो क्या यह भारतीय पुलिस ,भारतीय न्यायपालिका व लोकतांत्रिक प्रणाली द्वारा निर्वाचित प्रधानमंत्री का अपमान नहीं हैं?

आज भारत मोदी जी के नेतृत्व में विश्व की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था  बन गया है जी-20 अध्यक्षता कर रहा है तो क्या यह  अंतर्राष्ट्रीय साजिश नहीं है? 
आज के भारत की दिलचस्पी 2002 मैं नहीं है आज के भारत के दिलचस्पी 2024 में हैं भविष्य में है अतः ऐसा केस जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि" ये ऐसा केस है जैसे कोई शक्ति चाहती हूं कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ आरोपों की पतीली उबलती रहे"।

अब यह फैसला  भारत की जनता को लेना है कि उसे अपने देश की लोकतांत्रिक प्रणाली में देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था में विश्वास है या औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रसित एक ऐसी समाचार एजेंसी में जिसमे वस्तुनिष्ठता का अभाव है और जो साजिशन भारत के लोक प्रिय प्रधानमंत्री की जिनके नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है की छवि धूमिल  करने का प्रयास कर रही है।

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