Bhisma Dwadashi 2023: पितृ दोष दूर करने के लिए करें भीष्म द्वादशी की पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Bhisma Dwadashi 2023: आज यानी गुरुवार को भीष्ण द्वादशी की पूजा की जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा का विधान है। हिंदू पंचाग के मुताबिक, माघ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भीष्म द्वादशी होता है। इसे गोविंद द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। आज के दिन तिल से स्नान, तिल से होम और तिल से भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भीष्म द्वादशी के दिन भगवान विष्णु की विशेष रूप से पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख समृद्धि की वृद्धि होती है और श्रीहरि का आशीर्वाद सदैव मिलता रहता है।
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पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, सूर्य के उत्तरायण होने पर जब भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्याग दिए थे तो अष्टमी को उनका अंतिम संस्कार किया गया था। वहीं माघ शुक्ल द्वादशी को पितामह का अंतिम क्रिया कलाप किया गया। इसी वजह से आज के दिन को भीष्ण द्वादशी कहते हैं। कहते हैं कि भीष्म द्वादशी के दिन पितरों का तर्पण करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है। इतना ही नहीं आज के दिन भगवान कृष्ण और लक्ष्मी नारायण जी की पूजा से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। साथ ही सुयोग्य संतान की भी प्राप्ति होती है।
भीष्म द्वादशी पूजा शुभ मुहूर्त
द्वादशी तिथि प्रारंभ- दोपहर 02 बजकर 01 मिनट से (1 फरवरी 2023)
द्वादशी तिथि समापन- शाम 4 बजकर 26 मिनट तक (2 फरवरी 2023)
भीष्म द्वादशी पूजा विधि
सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहन लें। घर-मंदिर की सफाई कर गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लें। इसके बाद भगवान कृष्ण और विष्णु जी का पंचामृत से स्नान कराएं। अब धूप, दीप, अगरबत्ती जलाएं। भगवान जी को फूल, फल, अक्षत, मिश्री और तुलसी के पत्ते चढ़ाएं। श्री विष्णु चालीसा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। विष्णु जी या कृष्ण आरती के साथ पूजा संपन्न करें।
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