अयोध्या: नगर की निधि ही नहीं, समयबद्ध शिक्षक भी थे डॉ. स्वामीनाथ
अयोध्या, अमृत विचार। प्रख्यात साहित्यकार डॉ. स्वामीनाथ पांडेय की स्मृति में कालिकुलायल की ओर से टेढ़ी बाजार में शोक सभा का आयोजन किया गया। शोकसभा में कई बुद्धिजीवियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
डॉ. जनार्दन उपाध्याय ने कहा कि आज हम लोगों ने सजग लोकाराधक, शब्द साधक को खो दिया, जिसकी पूर्ति असंभव है। डॉ. पांडेय नगर की निधि थे और समयबद्ध शिक्षक रहे। डॉ. नर्मदेश्वर पाण्डेय ने उनकी त्याग-तपस्या और ईमानदारी पर प्रकाश डाला। डॉ. मनमोहन सरकार ने अपना शिक्षागुरु बताते हुए उन्हें बहुआयामी व्यक्तित्व का संयमी, स्पष्टवादी कहा।
सभा-संयोजक साहित्यकार डॉ. रामानन्द शुक्ल ने कहा कि डॉ. पांडेय विद्या-व्यासंगी, बहु भाषा, वैदुष्य मण्डित विद्या-वाङ्मय के पुरोधा थे। ज्ञानयज्ञ के आचार्य ने साहित्य को जिया और अध्यापनकाल में गरीब विद्यार्थियों का बिना किसी भेदभाव के उदार चेता ने सहयोग किया। हनुमान प्रसाद मिश्र ने कृत्रिमता से दूर सहज सादगी स्वभाव वाला व्यक्ति कहा।
समाजसेवी सम्पूर्णानन्द बागी ने उन्हें लोकचित्त में सदा रमने वाले वाला कहा। शिवकुमार मिश्र ने गम्भीर, वात्सल्यमय विद्वान बताया। अध्यक्षीय सम्बोधन में ओमप्रकाश ब्रह्मचारी ने कहा कि डॉ.साहब विशिष्ट विद्वान ब्रह्मचारी के साथ ही सबको अपना आत्मीय बना लेते थे। सबके दिल को जीत लेते थे। उनकी मेधा एवं विद्या विलक्षण थी। रामचन्द्र अग्निहोत्री ने मानवता की मूर्ति के रूप में उनका स्मरण किया।
इस अवसर डॉ. विन्ध्यमणि, तेजप्रताप तिवारी, वरुण त्रिपाठी, राजेश वर्मा, ओङ्कारनाथ पाण्डेय, शशिकांत पाण्डेय, आलोक निगम, गोविन्द सोनी, कामेश पाठक, सौमित्र, हर्षित, अरुणेश पाठक, प्रशान्त उपाध्याय, रमेशचन्द्र शुक्ल, असिता शुक्ला और स्वाती शुक्ला आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता आचार्य ओमप्रकाश ब्रह्मचारी ने की।
