मुरादाबाद : चिंताजनक! 48 प्रतिशत किशोरियां एनीमिया की शिकार, स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में खुली पोल
चिंताजनक : महिला बाल विकास एवं पुष्टाहार और स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में खुली पोल
मुरादाबाद, अमृत विचार। कुपोषण व एनीमिया मुक्त कराने के लिए भले ही कवायद तेज हो व तमाम दावे किए जा रहे हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। इस बात का खुलासा महिला बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के ताजा आंकड़े कर रहे हैं। जिले में एनीमिया पीड़ित किशोरियों की संख्या पहले 5915 थी। जो अब पहले के मुकाबले 885 और बढ़ी है। अब सवाल उठता है कि आयरन की टेबलेट और पुष्टाहार कहां जा रहा है। इसमें स्वास्थ्य विभाग की भी लापरवाही साफ झलक रही है।
प्रधानमंत्री की एनीमिया मुक्त भारत अभियान योजना को जिले में पलीता लगाया जा रहा है। योजना के लागू होने के बाद महिला बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा राज्य में फरवरी 2019 में 11 से 14 वर्ष की किशोरियों के लिए स्कीम फॉर एडॉलसेंट गर्ल्स योजना का शुभारंभ किया था। इसका उद्देश्य किशोरियों को शारीरिक रूप से सशक्त बनाना था।
इसके लिए महिला बाल विकास विभाग की ओर से जनपद में सुपरवाईजर द्वारा कराए गए सर्वे में 5915 बालिकाओं को चिन्हित किया गया। इसमें भगतपुर टांडा ब्लॉक में ही सर्वाधिक 1435 और डींगरपुर ब्लॉक में 1025 किशोरियां मिली थी।
विभागीय अधिकारी की माने तो किशोरियों को प्रति माह खाद्यान्न, आयरन, कैल्शियम व फोलिक एसिड, विटामिन सी आदि की गोलियां भी निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस योजना में बरती गई लापरवाही की पोल हाल ही में कराए गए सर्वे के आंकड़े खोल रहे हैं जिसमें एनीमिया पीड़ित किशोरियों की संख्या बजाए घटने के स्थान पर और बढ़कर 6800 हो गई। पहले के मुकाबले 885 किशोरियों में एनीमिया की कमी पा गई है। जनपद में अब भी 48 फीसदी किशोरियां एनीमिया से पीड़ित हैं जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा हो रहा है।
महिला बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग अधिकारी अनुपमा शांडिल्य ने बताया कि पहले गांव देहात में किशोरियों की जांच लिए खून लेने पर उनके परिजन ऐतराज करते थे।अब बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा ईजी रैक्स डिवाइस से किशोरियों की जांच कराई जाएगी जिसमें बिना खून निकाले ही खून की जांच हो जाएगी। उन्होंने बताया कि डिवाइस के लिए जनप्रतिनिधियों ने भी पैसा दिया है।
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