खनिज का मिलना

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

देश के जम्मू कश्मीर क्षेत्र में लिथियम का भंडार का मिलना बहुत बड़ी बात है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) ने 59 लाख टन लिथियम के भंडार की पहचान की है। देश में लिथियम का इतना बड़ा भंडार मिलना न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा।

हालांकि, सिर्फ भंडार मिलने से ही लिथियम ऑयन बैटरी का निर्माण करना एकदम आसान नहीं होगा। चूंकि अभी तक भारत के पास लिथियम की खुदाई और प्रोसेस करने की तकनीक नहीं है। दरअसल, लिथियम का उत्पादन और रिफाइनिंग एक बेहद मुश्किल काम है। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक की ज़रुरत होती है। 59 टन लिथियम की कीमत 3384 अरब रुपये होगी। 

लिथियम एक तरह का खनिज पदार्थ है। जिसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों, मोबाइल फोन और लैपटॉप में किया जाता है। जानकारों के मुताबिक डीजल और पेट्रोल गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने की दिशा में यह काफी महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि वर्तमान में भारत 96 प्रतिशत लिथियम आयात करता है। जिसमें 80 प्रतिशत सिर्फ चीन से आयात कर रहा है। ऐसे में भंडार के मिलने से भारत की अन्य देशों पर आत्मनिर्भरता भी कम होगी और साथ ही भारत अन्य देशों को लिथियम का निर्यात भी कर सकेगा जिससे देश को बड़ा आर्थिक लाभ होगा। 

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आई.इ.ए) की माने तो वर्ष 2025 तक दुनिया को लिथियम की कमी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में भारत में मिला लिथियम इस कमी को भी दूर करेगा। ध्यान रहे कि भारत ने 2070 तक अपने उत्सर्जन को पूरी तरह से इन्वॉरमेंट फ्रेंडली करने का संकल्प लिया है।

भंडार मिलने से यह न सिर्फ संकल्प सिद्धि में मददगार साबित होगा, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के दिशा में एक बड़े बाजार की स्थापना की दिशा में कारगर भी सिद्ध होगा। क्योंकि ईवी की बैटरी में लिथियम का एक महत्वपूर्ण घटक के रूप होना जरूरी है।

लिथियम का यह भंडार देश को तकनीक की दुनिया में आगे बढ़ने में भी कारगर साबित होगा। ऐसे में भारत तकनीक की दुनिया में भी बड़ा उत्पादक बन सकता है। अभी लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे कई अहम खनिजों के लिए भारत आयात पर निर्भर है। आयात पर निर्भरता कम करने के लिए आवश्यक है कि देश में महत्वपूर्ण खनिजों के भंडार खोजे जाएं और उनकी प्रोसेसिंग हो।