बरेली: टूटेगी 160 साल पुरानी परंपरा, कुतुबखाना-कालीबाड़ी रोड से इस बार नहीं निकल पाएगी राम बारात
बरेली, अमृत विचार। शहर में चल रही निर्माण की परियोजनाओं की लेटलतीफी से आम लोगों के लिए तो सालों से सिरदर्द बनी ही हुई है, अब भगवान श्रीराम को भी इसी वजह से अपना रास्ता बदलना पड़ेगा। 160 साल से होली से पहले कुतुबखाना रोड पर गुजरती रही राम बारात के लिए इस बार नए रास्ते की तलाश की जा रही है। लोगों में इस बात पर नाराजगी है कि अगर अफसर अपने दावे के मुताबिक समय पर कुतुबखाना पुल का निर्माण करा देते तो रामबरात का रास्ता बदलने की नौबत नहीं आती।
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नाथ नगरी में होली से एक दिन पहले रामबारात की परंपरा न सिर्फ काफी प्राचीन बल्कि अनूठी भी है। भक्ति और मस्ती के अनूठे संगम का प्रतीक माने जानी वाली इस रामबरात पर सौहार्द का रंग भी बरसता है। सैकड़ों हुरियारों की मोर्चाबंदी का पूरा शहर गवाह बनता है, लेकिन इस बार रामबारात का 160 साल पुराना रास्ता बदलने की नौबत है। रामबरात का रूट बदलने की आशंकाओं के बीच यह भी सवाल खड़ा हो गया है कि हुरियारों का यह जुलूस अपने पुराने जोशोखरोश को बरकरार रख पाएगा या नहीं।
बता दें कि यह रामबरात बमनपुरी से शुरू होकर कूचा सीताराम, बड़ा बाजार, कुतुबखाना, कोतवाली, नावल्टी चौराहा, बरेली कॉलेज रोड और कालीबाड़ी से गुजरते हुए फिर बमनपुरी पहुंचकर संपन्न होती है। इस रूट पर इस बार रामबारात के लिए दो बड़ी बाधाएं हैं। कुतुबखाना फ्लाईओवर के निर्माण की वजह से नावल्टी चौराहे से कुतुबखाना चौराहे के बीच तो रामबारात निकलना मुश्किल है ही, इधर कालीबाड़ी रोड पर भी नाले का निर्माण शुरू करा दिया गया है जो होली से पहले पूरा हो पाना बहुत मुश्किल है। हालांकि नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने भाजपा नेताओं को भरोसा दिलाया है कि वह कालीबाड़ी में बन रहे नाले का निर्माण जल्द से जल्द पूरा कराने की कोशिश करेंगी।
नए रूट पर रामबारात निकालने में कई पेच, रास्ता छोटा होने के आसार ज्यादा
रामबारात के लिए नया रूट तय करना काफी पेचीदा साबित होगा। इसमें शासन की अनुमति की जरूरत तो पड़ेगी ही, आपत्तियों के पेच भी फंस सकते हैं। लिहाजा इस बात के आसार ज्यादा हैं कि रामबरात के रास्ते में कटौती कर दी जाए लेकिन ऐसा किए जाने से उसकी मस्ती और हुड़दंग में खलल पड़ने की आशंका है।
इसी कारण माना जा रहा है कि अफसरों को रामबारात को लेकर इस बार काफी दिमाग खपाना पड़ेगा। बता दें कि कुतुबखाना पुल के निर्माण की वजह से पिछले दिनों प्रकाश पर्व के जुलूस का भी रूट बदला गया था। प्रकाश पर्व का जुलूस कोहाड़ापीर से शुरु किया गया था जबकि परंपरागत तौर पर यह जुलूस सिविल लाइंस और कुतुबखाना से निकलता था।
निर्माण कार्य चल रहे हैं लिहाजा रामबारात का रूट तो बदलना पड़ेगा ही, लेकिन इसका फैसला समिति की बैठक में ही लिया जाएगा--- अनुपम कपूर, संरक्षक श्रीरामलीला सभा ब्रहमपुरी।
रामबारात के रूट से भाजपा का सीधा मतलब नहीं है। इसका निर्णय रामलीला कमेटी ही करेगी। कमेटी जो रूट बताएगी, उसी रूट से रामबरात निकलवाई जाएगी--- डॉ. केएम अरोरा, भाजपा महानगर अध्यक्ष।
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