बरेली: छुट्टा पशुओं की आईजीआरएस पर 20 दिन के अंदर 600 शिकायतों से पस्त हुए अफसर

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। छुट्टा पशुओं से अपनी फसलों को बचाने के लिए किसानों का संघर्ष कम होने में नहीं आ रहा है। समस्या इतनी विकराल हो चुकी है कि सिर्फ खेतों में नहीं बल्कि सड़कों और रिहायश में भी छुट्टा पशु लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। अब तक कागजी खानापूरी कर शासन को सबकुछ काबू में होने की रिपोर्ट भेज रहे अफसर अब छुट्टा पशुओं की समस्या आईजीआरएस पर गूंजने के बाद मुश्किल में फंस गए हैं। सिर्फ 20 दिनों में छुट्टा पशुओं को लेकर छह सौ से ज्यादा शिकायतें आईजीआरएस पर दर्ज कराई गई हैं। अफसरों को सूझ नहीं रहा है कि इन शिकायतों का निस्तारण कैसे किया जाए।

छुट्टा पशुओं की वजह से पूरे जिले में किस कदर त्राहि-त्राहि के हालात हैं, यह 1 से 21 फरवरी के बीच आईजीआरएस पर दर्ज कराई गईं 600 से ज्यादा शिकायतें साफ बयान कर रही हैं। आईजीआरएस पर पिछले कुछ समय में ये शिकायतें एकाएक बढ़ी हैं। अब तक किसान सीधे अफसरों से शिकायतें कर रहे थे जिनके बदले उन्हें आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिल पा रहा था। तहसील स्तर पर आयोजित संपूर्ण समाधान दिवसों में की गई शिकायतों पर भी कुछ नहीं हुआ। माना जा रहा है कि इसी कारण अब किसानों ने आईजीआरएस को अपना हथियार बनाया है और सीधे मुख्यमंत्री तक अपनी समस्या पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

कलेक्ट्रेट के एक वरिष्ठ लिपिक के मुताबिक आईजीआरएस पर की गई शिकायतों को निस्तारण के लिए खंड विकास अधिकारियों को भेजा जा रहा है। छुट्टा पशुओं के खिलाफ हर रोज इतनी ज्यादा शिकायतें आ रही हैं कि खंड विकास अधिकारी भी चकरा गए हैं। दिक्कत यह है कि उनके पास भी इन शिकायतों के समाधान के लिए कोई खास विकल्प नहीं है, लेकिन शासन के निर्देशों के मुताबिक उन्हें इस समस्या को हल भी करना है। सीधे आ रही शिकायतों को तो टाल दिया जा रहा था, लेकिन आईजीआरएस की शिकायतों के साथ भी यही रवैया दिखाने पर फंसने की भी आशंका है।

आशंका: इतनी शिकायतों से कहीं गोता न खा जाए जिले की रैंकिंग
आईजीआरएस की शिकायतों के निस्तारण के मामले में जिले की स्थिति पहले से कोई खास बेहतर नहीं है, अब छुट्टा पशुओं से संबंधित बेतहाशा शिकायतों से स्थिति और खराब होने का अंदेशा है। दरअसल, आईजीआरएस की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण करना होता है। ऐसा न कर पाने पर संबंधित अफसर को डिफाल्टर घोषित कर दिया जाता है। ओवरआल रैंकिंग पर भी इसका असर पड़ता है। ग्रामीण इलाकों में छुट्टा पशुओं की समस्या को हल करने की जिम्मेदारी खंड विकास अधिकारियों के सुपुर्द की गई है लिहाजा वे सबसे ज्यादा परेशान हैं।

छुट्टा पशुओं पर अफसरों के फर्जीवाड़े पर मंत्री भी जता चुके हैं नाराजगी
छुट्टा गोवंशीय पशुओं की जिले भर में भरमार है। पेट भरने के लिए खेतों में खड़ी फसलें ही उनका निशाना होती हैं। फसलों को बचाने के लिए किसानों को भीषण ठंड में रात भर जाग-जागकर खेतों की रखवाली करनी पड़ी लेकिन पशु पालन विभाग के अफसर इस समस्या का कोई हल निकालने के बजाय आंकड़ों में हेराफेरी करने में जुटे रहे। पिछले दिनों पशु धन मंत्री धर्मपाल सिंह ने खुद एक बैठक में अफसरों की ओर से छुट्टा पशुओं के बारे में पेश किए गए आंकड़ों को फर्जी बताते हुए उनकी जमकर डांट लगाई थी। हालांकि इसके बाद भी हुआ कुछ नहीं। अब जिले में लगातार गोकशी की घटनाएं भी सीधा इशारा कर रही हैं कि छुट्टा गोवंशीय पशुओं को गोशाला पहुंचाने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है।

सिर्फ गोवंश नहीं, आवारा कुत्ते और बंदर भी लोगों का सिरदर्द
सिर्फ गोवंशीय पशु ही नहीं, आवारा कुत्ते और बंदर भी जिले भर में लोगों का सिरदर्द बने हुए है। कई इलाकों में आवारा कुत्तों की भरमार है और वे इस कदर आक्रामक हैं कि बच्चों पर तक हमला कर देते हैं। इस तरह की घटनाओं में कई बच्चे जान गवां चुके हैं। सीबीगंज के गांव बंडिया में हाल ही में कई बच्चों को कुत्तों के घरों के सामने से खींच ले जाने की घटनाएं हो चुकी हैं। कई बच्चे जिले में जान भी गवां चुके हैं। शहरी इलाकों में बंदरों का जबर्दस्त आतंक है। नगर निगम और प्रशासन में आवारा कुत्तों और बंदरों की समस्या को लेकर शिकायतों की भरमार है लेकिन दोनों जगह उन्हें नजरंदाज किया जा रहा है। कुछ समय पहले शहर में बंदरों को पकड़ने का एक संक्षिप्त अभियान चलाया गया था लेकिन वह एक-दो वीआईपी इलाकों में ही सिमटकर रह गया।

ये भी पढे़ं- बरेली: कनेक्शन बंद कराने के नाम पर लाइनमैन ने महिला से 24 हजार ठगे

 

संबंधित समाचार