बरेली: एटीएम कार्ड धारक की मौत, एक लाख की मिलेगी बीमा राशि
बरेली,अमृत विचार। एटीएम कार्ड धारक का दो लाख रुपये का बीमा होता है। इस बात से शायद अधिकांश लोग अंजान ही हैं। मगर एक जागरूक मां ने सड़क दुर्घटना में मारे गए बेटे का एटीएम कार्ड बीमा पाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है। इसमें उन्हें सफलता भी मिली। उपभोक्ता फोरम ने बैंक को …
बरेली,अमृत विचार। एटीएम कार्ड धारक का दो लाख रुपये का बीमा होता है। इस बात से शायद अधिकांश लोग अंजान ही हैं। मगर एक जागरूक मां ने सड़क दुर्घटना में मारे गए बेटे का एटीएम कार्ड बीमा पाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है। इसमें उन्हें सफलता भी मिली। उपभोक्ता फोरम ने बैंक को 30 दिन के अंदर एक लाख रुपये की बीमा राशि चुकाने का आदेश दिया है।
सूफी टोला निवासी हाजरा बेगम के बेटे वसीम हुसैन की वर्ष 2016 में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उनका यूनियन बैंक का एटीएम कार्ड था। उसका बीमा कवर दो लाख रुपये का था। बेटे की मौत के बाद हाजरा बेगम ने बीमा राशि के लिए बैंक में दावा किया। इस तर्क के साथ कि बेटा अविवाहित था। बीमा राशि पाने की वारिस वह हैं।
बैंक ने सितंबर 2019 में उनसे कुछ कागजात मांगे। मगर धनराशि नहीं मिली। तब उन्होंने आरटीआइ के माध्यम से बैंक से इस मामले में जानकारी मांगी। पता लगा कि उनकी ओर से बैंक में कोई कागजात जमा नहीं किए गए हैं। इस बीच बैंक और विभिन्न कागजात बनवाने के लिए वह लगातार दौड़ती रहीं। अंत में उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम का रुख किया।
फोरम की दो सदस्सीय बैंच ने ने अपने फैसले में कहा है कि बैंक की ओर से विपक्षी के परिवादनी के दावे का खंडने करने के लिए कोई उपस्थित नहीं हुआ, न ही कोई बहस के लिए। इससे स्पष्ट होता है कि परिवादिनी का बीमा क्लैम न देकर बैंक ने उपभोक्ता सेवा में चूक की है। पारिवादिनी एक लाख रुपये का बीमा क्लैम पाने की हकदार हैं। फोरम के अध्यक्ष घनश्याम पाठक और सदस्य मुहम्मद कमर अहमद की दो सदस्यीय बैंच ने बैंक को 30 दिनों के अंदर यह धनराशि भुगतान करने का आदेश दिया है। देरी पर छह प्रतिशत ब्याज भरना होगा। इसके साथ ही पारिवादिनी यानी हाजरा बेगम को 2500 रुपये वाद खर्च भी देने का आदेश दिया है।
दुर्घटना पर बीमा का करें दावा
उपभोक्ता मामलों के वकील व आरटीआइ कार्यकर्ता मुहम्मद खालिद जीलानी कहते हैं कि क्रेडिट व डेबिट कार्ड का दो लाख का बीमा कवर होता है। दुर्घटना में जनहानि पर बैंक इसकी धनराशि देने को बाध्य हैं। इसके लिए संबंधित के वारिस को बैंक शाखा में संपूर्ण प्रमाण पत्रों के साथ आवेदन करना चाहिए। बैंक से सही जवाब न मिलने की स्थिति में उपभोक्ता फोरम, आयोग और स्थाई लोक अदालतों का रुख करना चाहिए। न्याय अवश्य मिलेगा।
