बरेली: 43 साल पुरानी सड़क, हाईकोर्ट में मुआवजे की अर्जी पर लखनऊ तक के अफसर हिले
1980 में डाली गई सड़क के लिए अब मौजूदा सर्किल रेट के दाम कैसे दिए जाएं
सड़क(DEMO IMAGE)
बरेली, अमृत विचार। करीब 43 साल पहले नवाबगंज तहसील के भदपुरा ब्लाॅक के गांव नकटी नरायणपुर में लोक निर्माण विभाग ने ओमपाल और बृजपाल के खेत में जो डामर वाली सड़क का निर्माण कराया था। उस सड़क ने अब बरेली से लेकर लखनऊ तक के बड़े अफसरों को हाईकोर्ट के चक्कर लगाने के लिए मजबूर कर दिया है।
1980 में डाली गई सड़क का मुआवजा न मिलने का आरोप लगाते हुए ओमपाल समेत अन्य ने मौजूदा सर्किल रेट के अनुसार मुआवजे की मांग करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, उसके अनुपालन में लोक निर्माण विभाग के अफसरों की अनदेखी, अब प्रशासनिक अफसरों को इतनी भारी पड़ रही है कि कई-कई घंटे जिलाधिकारी, एडीएम सिटी, एडीएम वित्त एवं राजस्व के साथ लोनिवि के प्रांतीय और निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता आदि अफसर बैठकें कर मुसीबत का हल ढूंढ रहे हैं, ताकि हाईकोर्ट में हुई रिट के मामले में साक्ष्यों के साथ प्रति शपथ पत्र व गठित कमेटी की संयुक्त रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकें।
ओमपाल आदि ने हाईकोर्ट से सड़क के निर्माण में गई भूमि की वर्तमान सर्किल रेट के अनुसार कीमत दिलाने की गुहार की है। इस मामले में 13 मार्च को हुई तारीख पर हाईकोर्ट में एडीएम सिटी डा. आरडी पांडेय और एडीएम वित्त संतोष बहादुर सिंह गए थे। अब 4 अप्रैल की तारीख लगी है। गुरुवार को सरकारी अधिवक्ता कलेक्ट्रेट में नकटी नरायणपुर गांव की सड़क प्रकरण से जुड़े कागजात तैयार कराने में जुटे रहे। शासन स्तर पर भी इसकी कड़ी निगरानी की जा रही है।
एडीएम वित्त एवं राजस्व अपनी देखरेख में अगली तारीख में प्रस्तुत करने वाले कागजातों को तैयार करा रहे हैं। कुछ दिन पहले एडीएम सिटी, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी, पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने नकटी नरायणपुर गांव में सड़क की पैमाइश की पूरी रिपोर्ट तैयार की थी। इससे संबंधित फाइलें भी लोनिवि के प्रांतीय खंड और निर्माण खंड में तलाशी गई हैं।
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