बरेली : बिजली कर्मचारियों की हड़ताल जारी, दफ्तरों पर लटके ताले, उपभोक्ता परेशान, मंत्री बोले- NSA में होगी कार्रवाई

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बरेली, अमृत विचार। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति (यूपी लखनऊ) ने बिजली कर्मचारियों व अभियन्ताओं की अपनी मांगों को लेकर गुरुवार रात 10 बजे से 72 घंटे की सांकेतिक हड़ताल की है। जो शुक्रवार को भी जारी है। इस हड़ताल का बड़ा असर खासकर पश्चिमी यूपी में भी देखने को मिल रहा है। कई जिलों के अलग-अलग स्थानों पर बिजली गुल गई हो गई है, जिससे लोगों को खासा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले एसडीओ, जेई और बिजली कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी है। उनकी हड़ताल का बिजली पर असर पड़ने लगा है। गुरुवार देर रात यूपी के कई जिलों में आई आंधी और बारिश के चलते कई जगह फाल्ट हुए। बात बरेली की करें तो बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से शहर से लेकर देहात तक में बिजली संकट गहरा गया। कई जगह फाल्ट होने के बाद कर्मचारी ठीक करने के लिए नहीं पहुंचे, जिसके चलते कई जगह पूरे दिन बिजली कटौती रही। वहीं गुरुवार की देर शाम को बिजली अधिकारियों ने अपने सीयूजी नंबर भी बंद कर लिए, जिससे उपभोक्ताओं की मुसीबतें और बढ़ गईं। दिन में अधिकारी हड़ताल पर रहे तो उपभोक्ता अपनी समस्या का समाधान कराने के लिए भटकते रहे। 

जिले में करीब 7 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें शहरी क्षेत्र में करीब 2 लाख और देहात क्षेत्र में 5.25 लाख उपभोक्ता हैं। हड़ताल का असर इन उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में बिजली का संकट और भी अधिक गहरा सकता है।

बता दें कि 2 दिसंबर 2022 को ऊर्जा विभाग और विद्युत कर्मचारियों के संगठन विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बीच उनकी मांगों को लेकर एक लिखित समझौता हुआ था। लेकिन अभी तक उसको अमल में नहीं लाए जाने पर विद्युत कर्मचारियों में रोष है। वहीं बीते दिनों ऊर्जा मंत्री के साथ दोबारा हुई वार्ता विफल होने के बाद से विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति सरकार के खिलाफ लामबंद हो गई है। जिसके बाद ऊर्जा विभाग की वादा खिलाफी का विरोध जताते हुए विद्युत कर्मचारियों ने मसाल जुलूस भी निकालकर धरना प्रदर्शन किया था।

साथ ही गुरुवार को दिन में कार्य बहिष्कार के बाद रात से बिजली कर्मचारियों ने 72 घंटे की कार्य बहिष्कार के साथ हड़ताल शुरू कर दी है। वहीं आज भी विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर, अभियंताओं के साथ ही निविदा और संविदा कर्मी अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्य अभियंता कार्यालय में धरने पर बैठे हुए हैं। हालांकि विद्युत तकनीकी कर्मचारी संघ ने संघर्ष समिति के आंदोलन में शामिल नहीं होने का फैसला लिया है और कर्मचारी संघ से जुड़े कर्मचारी और अधिकारी अपने-अपने कार्य कर रहे हैं। 

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ऊर्जा निगम के शीर्ष प्रबंधन के खिलाफ बिजली अधिकारियों और कर्मचारियों ने गुरुवार को दिन में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले मुख्य अभियंता राजीव कुमार शर्मा के कार्यालय में धरने पर बैठकर कार्य बहिष्कार किया। इसके बाद रात 10 बजे से हड़ताल शुरू कर दी है।

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इससे उपभोक्ता परेशान हुए। विद्युत उपकेंद्रों पर बिल सुधार, मीटर लगाना, फॉल्ट ठीक करने समेत अन्य काम ठप हो गए। हड़ताल में अधिशासी अभियंता, एसडीओ, जेई से लेकर संविदा कर्मचारी भी शामिल हैं, जिससे बकाया बिल वसूली से लेकर, बिजली चोरी रोकने को लेकर चलाए जा रहे अभियान के साथ नए बिजली कनेक्शन के आवेदन भी लंबित हो गए हैं।

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प्रदेश के विभिन्न जिलों में अप्रैल से पहले उपकेंद्रों के मरम्मत का काम चल रहा है। हड़ताल के चलते मरम्मत का काम प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा लोगों को नए कनेक्शन मिलने में दिक्कत हो रही है। अगर कोई उपभोक्ता अपना बिल सही कराने के लिए उपकेंद्र जाता है, तो उसको भी परेशानी झेलनी पड़ेगी। साथ ही अगर कहीं फॉल्ट आता है, तो बिजली कर्मचारी उसको बनाने से इनकार भी कर सकता है।

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इधर, सरकार ने कर्मचारियों एस्मा और रासूका लगाने की चेतावनी दी है। ऊर्जा मंत्री ने एके शर्मा कहा, ऊर्जा निगमों में जनवरी से 6 माह के लिए एस्मा प्रभावी है। ऐसे में हड़ताल के दौरान बिजली सप्लाई में किसी तरह का व्यवधान करने या उपकेंद्रों व अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने पर एस्मा और रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर थोड़े बहुत व्यवधान होती है, तो संयम बरतें।

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कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
9 साल, कुल 14 वर्ष एवं कुल 19 वर्ष की सेवा के बाद तीन प्रमोशन वेतनमान दिया जाए।
निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत चेयरमैन, प्रबन्ध निदेशकों व निदेशकों के पदों पर चयन किया जाए।
बिजली कर्मियों को कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जाए।
ट्रांसफॉर्मर वर्कशॉप के निजीकरण के आदेश वापस लिए जाए।
765/400/220 केवी विद्युत उपकेंद्रों को आउट सोर्सिंग के जरिए चलाने का निर्णय रद्द किया जाए।
पारेषण में जारी निजीकरण प्रक्रिया निरस्त की जाए।
आगरा फ्रेंचाईजी व ग्रेटर- नोएडा का निजीकरण रद्द किया जाए।
ऊर्जा कर्मियों की सुरक्षा के लिए पावर सेक्टर इम्प्लॉइज प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए।
तेलंगाना, पंजाब, दिल्ली व ओडिशा सरकार के आदेश की भांति ऊर्जा निगमों के समस्त संविदा कर्मियों को नियमित किया जाए।
बिजली कर्मियों को कई वर्षों से लम्बित बोनस का भुगतान किया जाए।
भ्रष्टाचार-फिजूलखर्ची रोकने के लिए लगभग 25 हजार करोड़ के मीटर खरीद के आदेश रद्द किए जाएं। इसलिए कर्मचारियों की वेतन विसंगतियां दूर की जाएं।



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