बरेली: चाय वाले के बेटे ने बिना कोचिंग पास की सिविल सेवा परीक्षा

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बरेली,अमृत विचार। कठिन परिश्रम… ये दो शब्द लिखने, पढ़ने और बोलने में तो सरल हैं लेकिन इन पर अमल कर पाना बेहद मुश्किल है। अगर मन में ठान लिया जाए तो फिर कुछ मुश्किल नहीं रहता है और वह कीर्तिमान स्थापित करता है। ऐसे ही पथ की बाधाओं को पार करते हुए बरेली जिले की …

बरेली,अमृत विचार। कठिन परिश्रम… ये दो शब्द लिखने, पढ़ने और बोलने में तो सरल हैं लेकिन इन पर अमल कर पाना बेहद मुश्किल है। अगर मन में ठान लिया जाए तो फिर कुछ मुश्किल नहीं रहता है और वह कीर्तिमान स्थापित करता है। ऐसे ही पथ की बाधाओं को पार करते हुए बरेली जिले की आंवला तहसील के कस्बे सिरौली के हिमांशु गुप्ता ने सिविल सेवा परीक्षा-2019 में 558वीं रैंक पाकर कीर्तिमान स्थापित किया। हिमांशु के पिता चाय की दुकान चलाते थे, जिस पर वह खुद मदद करने के लिए जाते थे। हालांकि अब पिता जनरल स्टोर संचालित कर रहे हैं।

संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2019 का फाइनल परिणाम साक्षात्कार होने के बाद 4 अगस्त को जारी किया था। इस परीक्षा में 558वीं रैंक पाने वाले हिमांशु की मंजिल जितनी शानदार है, पथ उतना ही पथरीला रहा। सिविल परीक्षा पास करने के लिए उन्होंने किसी कोचिंग सेंटर में न जाकर खुद पढ़ाई की। रोजाना आठ से दस घंटे पढ़कर सफलता अर्जित की।

हिमांशु ने दसवीं और बारहवीं की परीक्षा आंवला के बाल विद्यपीठ पब्लिक स्कूल से पास की। दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से बॉटनी विषय स्नातक ऑनर्स और इन्वायरमेंटल स्टडीज से परास्नातक की परीक्षा पास की। परास्नातक में दिल्ली यूनिवर्सिटी के गोल्ड मेडलिस्ट भी चुने गए। इसके बाद एमफिल करने के दौरान ही फरवरी 2019 के अंत में आईआरटीएस 2018 में चयन हो गया था। इससे पहले उन्हें नेट जेआरएफ की ओर से स्कॉलरशिप मिल रही थी। इससे उन्हें बाहर रहकर पढ़ाई में आर्थिक परेशानियों से भी नहीं जूझना पड़ा। हिमांशु के रिश्तेदार आलोक कुमार गुप्ता उर्फ सिटिल का कहना है कि वह शुरू से मेधावी रहे हैं।

कोचिंग सेंटर सिर्फ दिखावा, खुद करनी होगी मेहनत
हिमांशु का कहना है कि देश भर में संचालित हो रहे अधिकांश कोचिंग सेंटर सिर्फ दिखावा करते हैं। परीक्षा की तैयारियों के लिए खुद ही मेहनत करनी होती है। अगर आप, खुद कड़ी मेहनत करते हैं तो बिना कोचिंग के ही पास हुआ जा सकता है। उन्होंने कहा कि सफल होने वाले अधिकांश अभ्यर्थियों ने कोचिंग नहीं ली होती है और अगर कोचिंग शुरू करते हैं तो कुछ ही दिनों में छोड़कर खुद पढ़ाई करने लगते हैं। सिविल सेवा परीक्षा के लिए पहले तो खुद को तैयार करना होता है और बाद में परीक्षा की तैयारी करनी होती है।

डॉ. तकसीर बने प्रेरणास्रोत
हिमांशु बेबाकी से स्वीकार करते हुए कहते हैं कि उनके प्रेरणास्रोत सिरौली के मूल निवासी और अब जामिया मिल्लिया इस्लामियां विश्वविद्यालय दिल्ली में कार्यरत प्रोफेसर डॉ. तकसीर रहे हैं। उन्होंने बताया कि डॉ. तकसीर ने यूरोप से एमएस किया था।

परिवार का मिला पूरा सपोर्ट
हिमांशु के मुताबिक उनकी इस सफलता में परिवार का बहुत बड़ा सहयोग रहा। उन्होंने कहा कि पिता संतोष कुमार गुप्ता, मां चंचल गुप्ता ने हरसंभव कोशिश की, जिससे मेरी पढ़ाई में कोई बाधा न आए। इसके साथ ही बहन दीक्षा गुप्ता और मुस्कान गुप्ता ने मानसिक तौर पर सहयोग किया।

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