नैनो फफूंदीनाशक शोध से गेहूं के भंडारण में लगने वाले कवक संक्रमण से मिलेगी मुक्ति

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नैनो फफूंदीनाशक शोध परियोजना को मिली हरी झंडी

मेरठ, अमृत विचार। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्विद्यालय स्थित जैव प्रौद्योगिकी कॉलेज के पादप जैव प्रौद्योगिकी संकाय की नैनो फफूंदीनाशक शोध परियोजना को हरी झंडी मिली। इस शोध से गेहूं भंडारण में लगने वाले कवक संक्रमण से मुक्ति मिलेगी। 

पादप जैव प्रौद्योगिकी संकाय में सहायक प्रो. के पद पर कार्यरत डॉ. नीलेश कपूर की 25 लाख रुपये लागत की इस शोध परियोजना को स्वीकृत हुई। डॉ. नीलेश कपूर ने बताया कि गेहूं की उपज और कटाई से लेकर भंडारण तक विभिनन कवक (फफूंदी) रोगों से फसल को नुकसान होता है। जिस, कारण गेहूं किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। किसान इससे बचाव के लिए विभिन्न रासायनिक फफूंदीनाशको का उपयोग करते है, जिनसे शारीरिक स्वास्थय को नुक्सान होता है। साथ ही मिटटी की उर्वरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसकी क्षतिपूर्ति के लिए अधिक उर्वरको का उपयोग करना पड़ता है। इससे किसानो को दोहरा आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है।

डॉ. नीलेश कपूर गेहूं को भंडारण के समय कवक संक्रमण से होने वाले नुकसान से बचाव के लिए नैनो जैव प्रौद्योगिकी तकनीक द्वारा नैनो फफूंदीनाशक विकसित करेंगे। नैनो जैव प्रौद्योगिकी एक नवीन तकनीक है, जिसमें धातु के अतिसूक्ष्म कण रोगाणुओं को नष्ट करने योग्य विकसित किए जाते है। इस तकनीक से विकसित धातु के नैनो कणों को फसलो पर छिड़काव करने से हानिकारक रसायनिक फफूंदीनाशक से छुटकारा मिलेगा।

डॉ. नीलेश कपूर ने बताया कि उनका शोध कार्य सफल रहने पर न सिर्फ रासायनिक दुष्प्रभाव रहित एक नया कृषि उत्पाद उपलब्ध हो सकेगा, बल्कि इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी। बताया कि यह शोध परियोजना उत्तर प्रदेश कौंसिल ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च (उपकार) द्वारा स्वीकृत और वित्त पोषित है। परियोजना को सफल बनाने में कृषि महाविद्यालय से डॉ. कमल खिलाडी सह-अन्वेषक और कवकरोग विशेषज्ञ के रूप में अपना विशेष सहयोग प्रदान करेंगे। अभिनव सिंह बतौर युवा शोधकर्ता इस परियोजना में शोध कार्य करेंगे।

कुलपति डॉ. केके सिंह, कुलसचिव डॉ. बीआर सिंह, शोध निदेशक डॉ. अनिल सिरोही, जैव प्रौद्योगिकी कॉलेज के डीन डॉ. आर कुमार, संकाय अध्यक्ष डॉ. आरएस सेंगर ने स्वीकृति मिलने पर सराहना की।

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