मौसम की मार

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली बेमौसम बरसात ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कई दिनों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र समेत कई स्थानों पर जोरदार वर्षा हुई और ओले भी गिरे हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने मंगलवार को कहा कि देश के कई हिस्सों में अतिवृष्टि और ओले से गेहूं, सरसों, चना तथा कुछ अन्य फसलों को भी नुकसान हुआ है।

एक आकलन के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। साथ ही हमीरपुर, ललितपुर, महोबा, मिर्जापुर, प्रयागराज, सोनभद्र और वाराणसी में किसानों का बड़ा नुकसान हुआ है। सभी जिलों में जिलाधिकारियों को निगरानी के आदेश दिए गए हैं। मौसम विभाग (आईएमडी) ने कई दिनों तक प्रदेश के मौसम में भारी बदलाव, तेज बारिश और तूफान की चेतावनी दी है।

पिछले कुछ वर्षों में ग्लोबल वार्मिंग से जो तापमान वृद्धि हुई है, उससे मौसम के मिजाज में तेजी से परिवर्तन आया है। इस कारण हमारी खाद्य शृंखला पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के अन्तर-सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की सोमवार को जारी एक प्रमुख रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि दुश्वार होती जलवायु, दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी भारी पड़ेगी।

तापमान वृद्धि के साथ, जलवायु से उपजी खाद्य और जल असुरक्षा के भी बढ़ने की अपेक्षा है। ऐसे में केंद्र व राज्य सरकारों को फसलों के लिए नए शोध-अनुसंधान को बढ़ावा देने की जरूरत है, जो ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों से होने वाले नुकसान को रोकने में किसानों की मदद करे। आईएमडी ने किसानों को गेहूं और अन्य रबी फसलों की कटाई स्थगित करने की सलाह दी है।

क्योंकि देश के अस्सी करोड़ लोगों को दिए जा रहे खाद्यान्न सहायता कार्यक्रम पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। वहीं सरसों की फसल प्रभावित होने से खाद्यान्न तेलों के आयात का दबाव भी बढ़ सकता है। इससे महंगाई की चुनौती भी बढ़ सकती है। गौरतलब है कि राज्य सरकारें किसानों के नुकसान का आकलन कर रही हैं।

जब कभी भी प्राकृतिक प्रकोप के कारण राज्यों में फसलों का नुकसान होता है तो सरकारें उसका आकलन कराती हैं जिन किसानों की फसल प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना के तहत होती है, उसे होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति की जाती है लेकिन जो किसान बीमा योजना की परिधि में नहीं आते हैं, उन्हें राज्य आपदा प्रबंधन कोष से मदद दी जाती है। वर्तमान चुनौतियों के बीच केन्द्र को मौसम की मार से बेहाल किसानों के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।