Orai News : हाथी से उतर पंजा थामेंगे पूर्व कोआर्डिनेटर कमल दोहरे, 1988 में बसपा से जुड़े थे
उरई में हाथी से उतर पूर्व कोआर्डिनेटर कमल दोहरे पंजा थामेंगे।
उरई में हाथी से उतर पंजा कर पूर्व कोआर्डिनेटर कमल दोहरे का पंजा थामेंगे। 1988 में बसपा से जुड़कर कई महत्वपूर्ण पदों में भूमिका रहकर निभाई थी। कमल की सजातियों को लाने की भी -कोशिश पर अभी असमंजस बरकरार है।
राकेश द्विवेदी
उरई, अमृत विचार। छौना- मानपुरा के मूल निवासी कमल दोहरे का करीब साढ़े तीन दशक पुराना साथ आज बसपा से टूट जाएगा। प्रदेश में जब बसपा की सरकार थी, तब दोहरे बुंदेलखंड कोआर्डिनेटर थे। इस पद पर वे दो बार रहे। पिछले कुछ समय से पार्टी में वे उपेक्षित दिखे। ऐसे वक्त उन्हें कांग्रेस के बृजलाल खाबरी याद आये, जिनके साथ कमल कभी बसपा में आये थे। आज से अब दोनों नेता फिर से एक साथ होंगे। कोशिश है कि बड़ी संख्या में सजातियों के साथ शामिल हुआ जाए पर अभी उम्मीद के अनुरूप सफलता मिलना कठिन लग रहा है।
शहर का रघुवीरधाम गेस्ट हाउस आज फिर से एक बार राजनीतिक परिवर्तन का गवाह बनने जा रहा है। काफी समय से उहापोह की स्थिति में फंसे कमल दोहरे ने आखिर हाथी से उतरने का निर्णय ले लिया है। वे कहते हैं कि पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी के संपर्क में आकर 1988 में बसपा से जुड़े रहे। समय के साथ उनका राजनीतिक उभार हुआ। संगठन में कई महत्वपूर्ण पदों पर वे रहे। प्रभाव तब बढ़ा जब वे प्रदेश में बसपा की सरकार के वक्त 2009 से 2012 तक बुंदेलखंड कोआर्डिनेटर बने। इस दौरान उनके रौब और स्वभाव में परिवर्तन दिखा। इसके बाद वे फिर इसी पद पर लौटे और 2014 तक जिम्मेदारी संभाली।
बसपा से मोहभंग और कांग्रेस के प्रति प्रभावित होने का कारण जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी कांग्रेस का जो राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ और उसमें संविधान और लोकतंत्र बचाने को जो प्रस्ताव पारित हुआ , इससे मैं प्रभावित हुआ।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष दीपांशु समाधिया भी खुश दिखे। बोले- मेहनत धीरे- धीरे रंग ला रही है। उम्मीद है कि भविष्य में दोहरे समाज का एक बड़ा वर्ग उनके साथ होगा। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद बृजलाल खाबरी पर भी बुंदेलखंड में पार्टी की स्थिति मजबूत करने का दबाव है। वे बसपा में बड़े पदों पर रहे हैं। अभी भी उनका संपर्क तमाम नेताओं और दलित बिरादरी से जुड़ा है। उनका पहला प्रयास यही है कि चुनाव तक दलित वर्ग को फिर से कांग्रेस की ओर मोड़ा जाए।कमल दोहरे का आज कांग्रेस में शामिल होना उसी रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है। भविष्य में कमल को पार्टी में उनके अनुभव के आधार पर कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलना भी तय है।
