अनबॉर्न चाइल्ड डे : कम उम्र में गर्भ धारण, बन रहा गर्भपात का कारण, जच्चा-बच्चा अस्पताल में 329 हुए गर्भपात
कानपुर के जच्चा-बच्चा अस्पताल में 329 व डफरिन में 650 से अधिक हुए गर्भपात।
कानपुर के जच्चा-बच्चा अस्पताल में 329 व डफरिन में 650 से अधिक हुए गर्भपात।सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 3.4 फीसद 15 से 19 साल की लड़कियां गर्भवती।
कानपुर, [विकास कुमार]। कानपुर में शादी से पहले मां बनने वाली युवतियों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। इसका खुलासा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य की सर्वे रिपोर्ट पांच में हुआ है। जिले में 15 से 19 साल की उम्र की 3.4 फीसदी किशोरियां व युवतियां मां बन चुकी है या गर्भवती है। जबकि पांच साल पहले हुए सर्वे की रिपोर्ट में यह आंकड़ा 1.4 फीसदी था। कम उम्र में गर्भधारण होना गर्भपात का मुख्य कारण बन रहा है।
कानपुर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सर्वे किया था, जिसमें 15 से 19 साल की गर्भवती किशोरियों व युवतियों के बारे में पता लगाना था। क्योंकि कम उम्र में मां बनने पर लड़की के सामने अक्सर समस्या होती है। उन्हें प्री-मेच्योर डिलीवरी का सामना करना पड़ सकता है। जो जच्चा और बच्चा दोनों की जान के लिए खतरा होता है। इस उम्र में बच्चे को ठीक से पोषण न मिलने की वजह से कम वजन का हो सकता है।
जिससे उसकी सेहत पर बुरा असर पड़ता और गर्भ में ठीक से विकास भी नहीं हो पाता है। टीन एज में मां बनने से बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ता है और बच्चे अक्सर मानसिक रूप से विकृत पैदा होते हैं। मां को भी कई स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य-पांच के सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक कानपुर में 15 से 19 साल की 3.4 फीसदी किशोरी व युवतियां मां बन चुकी है या गर्भवती है। जबिक पांच साल पहले यह आंकड़ा 1.4 फीसदी ही था।
हैलट में 329 व डफरीन में 650 से ज्यादा ऑर्बशन
कानपुर के हैलट अस्पताल में बने जच्चा-बच्चा अस्पताल में अप्रैल 2022 से फरवरी 2023 तक 329 युवतियों व महिलाओं ने ऑर्बशन कराया है, जिसमें कुछ 20 से 26 साल की युवतियों की संख्या भी शामिल है, जो शादी से पहले ही मां बन गई थी। उनका अस्पताल में नियमानुसार ऑर्बशन हुआ। वही, शादी के बाद न चाहते हुए गर्भधारण होने पर नवविवाहिताओं की भी संख्या इसमें शामिल है। वही, डफरीन अस्पताल में एक साल में करीब साढे़ छह सौ से अधिक ऑबर्शन हुए। इसमें भी विवाहित महिला व कुछ अविवाहित लड़िकयां शामिल है।
अस्पताल में विवाहित महिलाओं के ऑर्बसन की सुविधा है। साथ ही नवविवाहित जोड़ों को परिवार नियोजन के साधन अपनाने के प्रति जागरूक किया जाता है। ताकि वह अनचाहे गर्भ से बची रहे।- डॉ.सीमा श्रीवास्तव, एसआईसी डफरिन अस्पताल
राष्ट्रीय किशोर व किशोरी स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत किशोरियों व युवतियों को जागरूक किया जाता है। स्कूलों व कॉलेज में भी अभियान चलाकर छात्राओं को जागरूक जानकारी दी जाती है।- डॉ. आलोक रंजन, सीएमओ
