Karauli Baba हुए डिजिटल, विदेशियों का वीडियो कांफ्रेसिंग से कराते समस्या का हल, एकाउंट में लेते 2.50 लाख रुपये

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर के करौली बाबा डिजिटल हो गए।

कानपुर के करौली बाबा डिजिटल हो गए। विदेशियों का वीडियो कांफ्रेसिंग से समस्या का हल कराते है। जिसका एकाउंट में 2.50 लाख फीस ट्रांसफर होने के बाद पूजन कराया जाता है।

कानपुर, अमृत विचार। बीमारियों की मूल जड़ पिछले जन्म के कर्मफल होते है। अनुष्ठान से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा से पिछले जन्म के कर्मफल की स्मृतियां नष्ट होती है। इंसान में रोग का कारण स्मृतियां है। अनुष्ठान के माध्यम से स्मृतियां नष्ट हो जाती है, जिससे रोगों का नाश होता है। यह कहना है बाबा करौली का। बाब ने बताया कि  विदेशों में बैठे मरीजों का वीडियो काल व जूम एप के माध्यम से अनुष्ठान करा कर उनकों सही किया जाता है, जिसका करौली बाबा 2.50 लाख रुपया फीस लेते है।

बिधनू थानाक्षेत्र में स्थित बाबा करौली सरकार आश्रम में बीमारियों से छुटकारे के लिए देश के कोने-कोने से मरीज आश्रम में आते है, जिनका इलाज वैदिक  पद्धति के आधार पर किया जाता है। इसके लिए मरीजों को बीमारियों से निराकरण के लिए अनुष्ठान के साथ-साथ आश्रम में रहने व खाने के लिए भी मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। आश्रम में अनुष्ठान के कराने के साथ बाबा का डिजिटली अवतार सामने आया है। आश्रम में मीडिया कर्मियों से बातचीत के दौरान करौली बाबा ने कहा कि विदेशी मरीजों के इलाज के लिए वह 2.50 लाख रूपये की फीस लेते है।

जिसके बाद वीडियो कालिंग व जूम एप के माध्यम से अनुष्ठान कराया जाता है। करौली बाबा ने बातचीत के दौरान बताया कि विदेशों में भी बहुत से उनके अनुयायी है, जो कई बार आश्रम में आ चुके है। करौली सरकार दरबार में श्रद्धा रखने वाले विदेशी नागरिक जो इलाज के लिए बार-बार आश्रम नहीं आ सकते उनके उपचार के लिए करौली बाबा डिजिटल रूप से उपलब्ध होते है। आश्रम के सेवादार ने बताया कि आश्रम के खाते में  2.50 लाख ट्रांसफर करने के बाद मरीज को सुविधा के अनुसार एक दिन सुनिश्चित कराया जाता है।

जिसमें करीब एक घंटे का बाबा अनुष्ठान वीडियो कालिंग के माध्यम से कराते है। विदेशों में बैठे-बैठे मरीजों को ठीक करने के सवाल पर करौली बाबा ने बताया कि ये सूक्ष्म जगत का मामला है, स्मृतियों का संकल्प है। प्रार्थना और संकल्प करने से मरीज चाहे जहां हो स्वस्थ्य हो जाता है। बाबा ने बताया कि बहुत से मरीज सही होने के बाद विदेशों से आश्रम में दर्शन करने को आते है।

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