प्रयागराज : भगवान शिव के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले की जमानत याचिका में हस्तक्षेप से इनकार
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फेसबुक पर भगवान शिव के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा में टिप्पणी करने के आरोपी आसिफ के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसे अपराध जिनमें लोगों या समुदाय के वर्गों के बीच नफरत को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति होती है, उन्हें सख्ती से खत्म करना होगा। समुदाय को व्यापक नुकसान की कीमत पर नरम रवैया अपनाकर अपराधों को समाज में फलने-फूलने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
उक्त आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर की एकलपीठ ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 के तहत आसिफ के खिलाफ थाना छर्रा, जिला अलीगढ़ में दर्ज मुकदमे की सुनवाई करते हुए दिया। दरअसल आरोपी ने फेसबुक पर हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां कीं। अन्य सह आरोपियों द्वारा सांप्रदायिक नफरत को बढ़ावा देने वाली और टिप्पणियां फेसबुक अकाउंट के कमेंट सेक्शन में की गई।
अभियुक्त के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उक्त टिप्पणियां याची के लेखन के तहत नहीं की गई हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि पोस्ट में नियोजित शब्द स्पष्ट रूप से समुदाय के एक विशेष वर्ग या देश के नागरिकों के एक वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के दुर्भावनापूर्ण इरादे से बनाए गए हैं। अतः इससे फर्क नहीं पड़ता है कि याची टिप्पणियों का लेखक है या प्रतिपादक। अंत में कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दाखिल याचिका खारिज कर दी।
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