UP Nikay Chunav 2023 : महापालिका से नगर निगम तक का सफर, ऐसे बदला कानपुर, यहां देखें- पूरी लिस्ट

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कानपुर में 63 साल में 13 अरब से ऊपर नगर निगम का बजट पहुंच गया।

कानपुर में 63 साल में 13 अरब से ऊपर नगर निगम का बजट पहुंच गया। 11 मई को कानपुर में महापौर और पार्षद पद के लिए मतदान होगा।

कानपुर, अमृत विचार। शहर की सरकार चुनने का एक बार फिर मौका आ गया है। 11 मई को कानपुर में महापौर और पार्षद पद के लिए मतदान होगा। ऐसे में यह जानना भी जरूरी है कि शहर में इन चुनावों की शुरुआत कैसे हुई? क्या शुरू से ही नगर निगम था, या फिर इससे पहले इसका स्वरूप क्या था। दरअसल, ब्रिटिश शासनकाल में 1860 में नगर पालिका परिषद अस्तित्व में आया था। 22 नवंबर को तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में इसकी स्थापना की गई। लाला शिव प्रसाद कानपुर म्युनिसिपल कमेटी के पहले वाइस चेयरमैन बने थे। जाने महापालिका से नगर निगम तक के सफर में कैसे कानपुर शहर बदलता गया…

कानपुर नगर पालिका परिषद की स्थापना के समय टाउन हाल भवन कूपरगंज जो अब कोपरगंज कहलाता है, वर्ष 1879 में लगभग 2.16 लाख रुपये से बनवाया गया था। उस समय कानपुर नगर पालिका परिषद की आय 10 लाख रुपये थी। लगभग 403 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले नगर निगम की सीमा भी अब 567 वर्ग किलोमीटर तक फैल गई है। जिसमें 18 गांव नगर निगम सीमा के साथ जुड़ रहे हैं। कभी नगर महापालिका में बाबू रहे भूपेश अवस्थी ने बताया कि, उन्होंने 1974 से 1976 तक यहां नौकरी की। उसी दौरान कानपुर विकास प्राधिकरण अस्तित्व में आया। इस बीच शहर का भी तेजी से विस्तार हुआ। सोसाइटी क्षेत्रों से लेकर तमाम मोहल्ले अस्तित्व में आते चले गए।

1960 में महापालिका का गठन 

वर्ष 1959 में नगर महापालिका का दर्जा देने की दिशा में कदम बढ़े। दो फरवरी, 1960 में महापालिका का गठन कर दिया गया। उस समय तक कानपुर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट विकास के कार्य देखता था, जिसका चेयरमैन उप नगर प्रमुख होता था। इसीलिए अंग्रेजों के जमाने में निर्मित भवनों, विकास कार्यों से जुड़े कार्यों में अभी तक कानपुर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के शिलापट लगे हुए हैं।

जब 15 साल तक नहीं हुआ चुनाव

शहर में 30 जून 1973 से जनवरी 1988 तक लगभग 15 साल चुनाव नहीं हुए। स्थानीय निकाय व्यवस्था सुचारु नहीं होने से सदन स्थगित रहा। इस दौरान जिला प्रशासन के अधिकारी प्रशासक के रूप में काम करते रहे। जहां आज नगर आयुक्त शिवशरणप्पा बैठते हैं वहां पर भी प्रशासक भवन लिखा हुआ है। इसी तरह नगर निगम मुख्यालय में भी पिछले दिनों एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग लिखा गया है। क्योंकि, महापौर और पार्षदों का कार्यकाल खत्म हो गया है। इसके बाद पूरी बागदौड़ नगर आयुक्त और डीएम विशाख जी अय्यर के पास आ गई है।

इन्होंने सभासद से मंत्री तक सफर किया तय

कानपुर शहर में कई सभासद आगे चलकर विधायक, महापौर सांसद और मंत्री तक बने। महापौर रहीं प्रमिला पांडेय भी कभी सभासद थीं। कांग्रेस विधायक रहे अजय कपूर भी इसी सीढ़ी की बदौलत आगे बढ़े। इसके साथ ही नीरज चतुर्वेदी, राकेश सोनकर, कमलरानी वरुण, अब्दुल रहमान खां नश्तर, पशुपति नाथ मेहरोत्रा, बाबू बदरे, बाबूराम शुक्ला, सुशीला रोहतगी, शिव लाल बाल्मीकि, जटाधर बाजपेई, धीरेंद्र नाथ बनर्जी, रतन लाल शर्मा व भागवत प्रसाद तिवारी भी इसी तरह आगे बढ़े। 

एक साल के लिए चुने जाते थे जनप्रतिनिधि

नगर पालिका और महापालिका में पहले एक साल के लिए ही जनप्रतिनिधि चुने जाते थे। सभासद व मेयर पद का सेवाकाल एक साल का रहता था, जबकि उप नगर प्रमुख का चयन पांच वर्षों के लिए किया जाता था। वर्ष 1960 में पहले गठन में लालता प्रसाद दरियाबादी चुनाव जीतकर सभासद बने। इसके बाद उनकी पत्नी कमला दरियाबादी वर्ष 1980 से 1989 तक विधायक रहीं, जबकि उनके पुत्र संजीव दरियाबादी ने 2002 से 2012 तक सीसामऊ सीट का प्रतिनिधित्व विधानसभा में किया।

1962 में मोतीझील लाया गया कार्यालय

नगर महापालिका के गठन के बाद जब काम बढ़ा तो कार्यालय कूपरगंज अब कोपरगंज से मोतीझील लाया गया। वर्ष 1960 में प्रक्रिया की शुरुआत हुई और 1962 तक कार्यालय यहां पर आ गया। विशाल भवन के अंदर स्थित सभागार में स्थानीय निकाय का पहला सदन 16 फरवरी, 1963 को लगा था। नगर पालिका के गठन के समय कूपरगंज स्थित टाउन हाल भवन में अब रिकार्ड रूम स्थापित कर दिया गया है। यह भवन चाचा नेहरू अस्पताल में हुआ करता था।


नगर प्रमुख, महापौर व प्रशासक

1960 राम रतन गुप्ता
1962 धीरेंद्र नाथ बनर्जी
1963 सरदार इंदर सिंह
1964 रतन लाल शर्मा
1965 सरदार इंदर सिंह
1968 भागवत प्रसाद तिवारी
1969 रामेश्वर टाटिया
1970 जटाधर बाजपेई
1971 रतन लाल शर्मा
1972 जागेश्वर प्रसाद त्रिवेदी
1989 श्रीप्रकाश जायसवाल
1991 सरदार महेंद्र सिंह
1995 सरला सिंह
2000 अनिल शर्मा 
2005 प्रशासक
2006 रवींद्र पाटनी
2012 जगतवीर सिंह द्रोण
2017 प्रमिला पांडेय

खास तथ्य

1860  कानपुर नगर महापालिका का गठन हुआ।
1973 से 1988 के बीच नहीं हुए चुनाव
1995 में कानपुर नगर निगम में जनता से महापौर चुनने की शुरुआत।

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