बरेली: कूलर, मटके, टोपी, गमछे सब पर महंगाई की गर्मी

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Edited By Amrit Vichar
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कीमतों में 10 से 20 फीसदी तक का उछाल, कूलर की घास और उसकी डलवाई भी महंगी

बरेली, अमृत विचार : गर्मी बढ़ते ही कूलर, मटके, टोपी और गमछों की कीमतों में 10 से 20 फीसदी तक का इजाफा हो गया है। दुकानों पर ग्राहकों का पहुंचना शुरू हो गया है और दुकानदारों को अच्छे मुनाफे की उम्मीद है। हालांकि गर्मी की जरूरतों पर महंगाई का साया पड़ने का असर लोगों के चेहरों पर साफ दिख रहा है।

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कालीबाड़ी में मटके बेचने वाले दुकानदारों के मुताबिक पिछले साल छोटा मटका 80 रुपये में बिक रहा था लेकिन इस बार उसकी कीमत सौ रुपये हो गई है। बड़े मटके की कीमत भी 120 रुपये से बढ़कर 200 रुपये तक हो गई है। बानखाना में दुकानदार बबलू ने बताया कि इस समय शहर में छोटी प्याली, छोटे गमले, चिड़ियों के पानी पीने के लिए कूंडे जैसी मिट्टी के छोटे-छोटे आयटम ही बनाए जाते हैं।

बड़े मटके बिथरी चैनपुर और देवरनिया के गांवों में बनाए जाते हैं। रोडवेज मार्केट में कूलर विक्रेता रमेश ने बताया कि पिछले साल तक कूलर की टिन 65 से 70 रुपये किलो थी जो अब 90 से 100 रुपये किलो मिल रही है। इससे कूलर के रेट बढ़ गए हैं। कूलर की घास और उसकी भरवाई भी महंगी हुई है।

दुकानदार रोहित ने बताया कि पिछले साल साधारण कूलर की घास 50 रुपये किलो और लाल पकी घास 60 रुपये किलो थी। इस बार इनका रेट 60 और 80 रुपये हो गया है। पटेल चौक पर दुकानदार अब्बास ने बताया कि पिछले साल साधारण टोपी की कीमत 50 से 100 रुपये थी, लेकिन इस बार 60 से 120 रुपये में बिक रही है। गमछा भी 100 से 120 रुपये तक का मिल रहा है।

अभी मटकों की बिक्री थोड़ी कम है। तेज गर्मी से साथ टंकी वाले मटकी की मांग बढ़ जाती है। अभी कारोबार मंदा है। - विनोद कुमार प्रजापति, कालीबाड़ी

महंगाई की मार मटकों के बाजार पर भी पड़ी है। इस बार बाजार में सौ से लेकर 250 रुपये तक के मटके उपलब्ध हैं। - पवन कुमार, कालीबाड़ी

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