UP Nikay Chunav 2023 : आप के हौसले बुलंद, ढहा Kanpur से बना कम्युनिस्ट आंदोलन का किला
UP Nikay Chunav 2023 कानपुर से बना कम्युनिस्ट आंदोलन का किला ढहा।
UP Nikay Chunav 2023 आप के हौसले बुलंद, कानपुर से बना कम्युनिस्ट आंदोलन का किला ढहा। राष्ट्रीय मान्यता को नगर निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी भुनाएगी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने स्वीकारा। इससे वामपंथी आंदोलन कमजोर हुआ।
कानपुर, [डॉ.संजीव मिश्र]। चुनाव आयोग के एक बड़े फैसले ने देश की सबसे पुरानी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को राष्ट्रीय मान्यता छीनकर करारा झटका दिया है और बस दस साल पुरानी आम आदमी पार्टी (आप) को राष्ट्रीय मान्यता देकर हौसले बुलंद कर दिये हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की मान्यता छिनने से कानपुर में बना कम्युनिस्ट आंदोलन का किला ढह गया है, वहीं आम आदमी पार्टी अब इस फैसले को सूबे के नगर निकाय चुनाव में भुनाने की तैयारी कर रही है।
चुनाव आयोग ने सोमवार को आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिया, तो उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओं को नगर निकाय चुनाव में जीत का रास्ता नजर आने लगा। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक वाजपेयी कहते हैं कि 26 नवंबर 2012 को आम आदमी पार्टी के रूप में एक राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत हुई थी। कार्यकर्ताओं के खून, पसीने और आंसू से आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला है।
आम आदमी पार्टी की सबसे बड़ी ताकत इसके कार्यकर्ताओं का जोश है और आज का दिन उनके लिए बड़ा दिन है। पार्टी को राष्ट्रीय दर्जा मिलने से कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ा है और इसी जोश से पार्टी उत्तर प्रदेश के निकाय चुनावों में जीत का परचम लहराएगी।
एक ओर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता उत्साहित हैं, वहीं वामपंथी खेमे में निराशा पसरी है। दरअसल 25-26 दिसंबर 1925 को कानपुर में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना हुई थी। बाद में इसी से टूट कर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) बनीं। अब सबसे पुरानी पार्टी का राष्ट्रीय दर्जा छिनने वामपंथियों को आहत कर गया है। उन्हें लग रहा है कि कानपुर में बना कम्युनिस्ट आंदोलन का किला ढह गया है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पोलित ब्यूरो की सदस्य पूर्व सांसद सुभाषिनी अली कहती हैं कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की मान्यता छिनना है तो तकनीकी प्रक्रिया, किन्तु इसमें कोई संशय नहीं है कि कम्युनिस्ट आंदोलन कमजोर हुआ है। पहले सरकार लचीली रहती थी, अब ऐसा नहीं है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव अरविंद राज स्वरूप कहते हैं कि हमें झटका तो लगा है किन्तु हम मेहनत कर यह दर्जा फिर हासिल करेंगे।
