मुद्दों की बात

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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प्रधानमंत्री की डिग्री पर सवाल उठा रहे राजनीतिक दलों से राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार ने कहा कि देश के समक्ष इससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। शरद पवार ने कहा कि बेरोजगारी, कानून व्यवस्था और मुद्रास्फीति जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है। नेता उन मुद्दों से दूरी बनाकर लोगों का और भला कर सकते हैं जो गैर जरूरी मुद्दे हैं या जिन पर बाद में भी बहस हो सकती है।

गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे और अरविंद केजरीवाल सहित कई विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कॉलेज की डिग्री को लेकर उन पर निशाना साधा हुआ है। अरविंद केजरीवाल पर तो इसी मसले पर गुजरात उच्च न्यायालय ने 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। पिछले दिनों में शरद पवार की यह दूसरी ऐसी टिप्पणी थी जिससे विपक्षी दलों की एकता व केंद्र सरकार को घेरने के प्रयासों को झटका लगा है।

गौरतलब है कि इससे पहले शरद पवार अडाणी समूह के समर्थन में सामने आए। विपक्ष इस मामले में जेपीसी गठन की मांग कर रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि एक बार जब उच्चतम न्यायालय द्वारा मामले की जांच के लिए समिति की घोषणा की जा चुकी है तो जेपीसी जांच की कोई आवश्यकता नहीं रह जाती है। यानि एनसीपी प्रमुख जेपीसी के बजाय उच्चतम न्यायालय की तरफ से नियुक्त समिति की जांच पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं जिसमें विपक्षी नेता सदस्य नहीं होते हैं।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि शरद पवार कभी भी कुछ हल्के अंदाज में नहीं कहते। दो दिन पहले ही एनसीपी प्रमुख ने नासिक में कहा था कि आज कोई राजनीतिक दल या नेता बेरोजगारी, महंगाई जैसे जनता के असल मुद्दों पर बात ही नहीं कर रहे। पवार के बयानों को नई राजनीतिक कहानी में रूप में देखा जा रहा है। शरद पवार अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं। सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी की वजह से अटकलों को हवा मिल रही है।  

2024 के चुनाव से पहले शरद पवार बड़ा खेल खेलते नजर जा रहे हैं। एक ओर पवार के बयान को अडाणी को ताकत देने वाला तो वहीं प्रधानमंत्री को असुविधा से निकालने वाला और विपक्षी एकता को झटका देने वाला भी माना जा रहा है, वहीं कहा जा रहा है कि उन्होंने आज की राजनीति की दशा और दिशा पर सवाल उठाए हैं। कुल मिलाकर 2024 चुनाव में राजनीतिक तस्वीर दिलचस्प होने जा रही है।