फैसले का आधार
सरकार का गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध जारी रखने का फैसला देश की खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने और पर्याप्त घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी फैसला है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध तब तक जारी रहेगा जब तक देश घरेलू बाजार के लिए खाद्यान्न की पर्याप्त आपूर्ति के मामले में सहज महसूस नहीं करता।
जानकारों के मुताबिक पिछले दिनों बेमौसम बरसात व ओलावृष्टि से नुकसान का जो आंकड़ा सामने आया है उसके अनुसार फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। यही वजह है कि एक अप्रैल से गेहूं खरीद की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बावजूद कई राज्यों में ज्यादा अनाज की आवक मंडियों में नहीं हो पाई है। साथ ही किसानों को होने वाले नुकसान को कम करने के मकसद से ही सरकारों ने खरीद नियमों में बदलाव करके राहत देने का प्रयास किया।
भारतीय खाद्य निगम के अध्यक्ष अशोक के मीणा ने हाल ही में कहा है कि इस वर्ष अनुमानित उच्च गेहूं उत्पादन भारतीय बाजार में सरकारी खरीद और सामान्य खपत दोनों के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हम मानते हैं कि हमें भारतीय बाजार के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी। जानकारों के मुताबिक निर्यात पर रोक जारी रहने से वैश्विक स्तर पर गेहूं की कीमतों में तेजी आ सकती है।
चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है लेकिन यह वैश्विक गेहूं व्यापार का एक प्रतिशत से भी कम है। भारत ने बढ़ती घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के उपायों के तहत मई 2022 में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध के फैसले का उस समय कई देशों ने विरोध भी किया था। इसके बाद से अटकलें लगाई जा रही थीं कि सरकार इस फैसले को कब तक जारी रखेगी।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि सरकार गेहूं के निर्यात पर रोक जारी रख सकती है। सरकार का गेहूं का स्टाक गरीबों के फूड प्रोग्राम के लिए सप्लाई में इस्तेमाल होता है। यह भंडार इस समय साल 2017 के बाद के निचले स्तर पर आ गया है। कहा जा रहा था कि ऐसे में सरकार निर्यात पर रोक को हटाने का जोखिम नहीं लेगी। परंतु सरकार का यह कदम खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और घरेलू कीमतों को स्थिर करने के वास्तविक आधार पर है।
