बेरोजगारों का हित
केंद्र सरकार ने नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी (एनआरए) का गठन कर भर्ती परीक्षाओं को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है जिसका उम्मीदवारों को काफी लाभ होगा। देश की शिक्षा प्रणाली बदलने के बाद केंद्र सरकार का युवा हित के क्षेत्र में यह महत्वपूर्ण कदम है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में भर्ती परीक्षाएं एक …
केंद्र सरकार ने नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी (एनआरए) का गठन कर भर्ती परीक्षाओं को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है जिसका उम्मीदवारों को काफी लाभ होगा। देश की शिक्षा प्रणाली बदलने के बाद केंद्र सरकार का युवा हित के क्षेत्र में यह महत्वपूर्ण कदम है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में भर्ती परीक्षाएं एक एजेंसी के तहत कराने की बात कही थी।
इसी क्रम में कैबिनेट ने यह एजेंसी गठित की है जो केंद्र सरकार की सेवाओं में भर्ती के लिए विभिन्न परीक्षा एजेंसियों को एनआरए के नीचे लाने का काम करेगी। इसकी शुरुआत रेलवे, बैंकिंग और एसएससी की आरंभिक परीक्षाएं एक साथ कराए जाने से होगी। नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी अब कॉमन एलिजिबिलीटी टेस्ट (सीईटी) कराएगी।
दरअसल अलग-अलग परीक्षा बोर्ड होने से परीक्षार्थियों को अब तक तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इनमें सबसे बड़ी परेशानी थी अलग-अलग परीक्षा पैटर्न की। यानी अलग-अलग सेवाओं के लिए एक कोर्स होने के बावजूद परीक्षा पैटर्न अलग था जिसके लिए परीक्षार्थियों को अलग-अलग ढंग से तैयारी करनी पड़ती थी। उसके बाद भी मुसीबत यह होती थी कि दो परीक्षाओं की परीक्षा तिथि कई बार एक ही दिन पड़ जाती थी। उस पर भी परीक्षा केंद्र कहां होगा यह भी परेशानी का विषय था। अलग-अलग विभागों में भर्ती के लिए परीक्षार्थियों को अलग-अलग फीस भी जमा करनी पड़ती थी और परीक्षा देने के लिए जाने में समय और पैसा भी व्यय होता था।
अब परीक्षाएं एक ही छत के नीचे लाने की कवायद इसीलिए की गई है ताकि परीक्षार्थियों को इन परेशानियों से मुक्ति मिल सके। परीक्षार्थियों की परीक्षा तिथि एक साथ होने, इसका अलग-अलग खर्च और हर परीक्षा के लिए अलग तैयारी करने के झंझट से परीक्षार्थियों को अब मुक्ति मिलेगी। गैर राजपत्रित पदों के लिए आवेदन करने वालों में हमारे देश में मध्यम और निम्न वर्ग के युवाओं की संख्या ज्यादा है, लिहाजा उन्हें इसका लाभ जरूर मिलेगा।
इन परीक्षाओं के लिए ढाई करोड़ युवा सालाना आवेदन करते हैं। इनमें से अधिकांश के अभिभावक किसी तरह बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाकर उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं तक पहुंचा पाते हैं। उस पर भी अलग-अलग परीक्षा पैटर्न, अलग खर्च जैसी मुसीबतें। भर्ती परीक्षा का बदला हुआ पैटर्न बेरोजगारी झेल रहे इस देश के बेरोजगार युवाओं को राहत देगा, ऐसी उम्मीद है। शुरुआत में तीन परीक्षाएं एनआरए के अधीन होने के साथ बाद में धीरे-धीरे अन्य परीक्षाएं भी इसके दायरे में आने से बेरोजगारों को अवश्य ही लाभ मिलेगा।
