सेवानिवृत्त जजों को सुविधाएं देने के मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
प्रयागराज, अमृत विचार। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें सेवानिवृत्त जजों को घरेलू मदद और अन्य सुविधाएं प्रदान करने के निर्देशों का पालन नहीं करने पर उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष सचिव (वित्त) और प्रमुख सचिव (वित्त) को हिरासत में लिया गया था। कोर्ट ने हिरासत में लिए गए अधिकारियों को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने अवमानना मामले में यूपी सरकार के मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव (वित्त) के खिलाफ हाईकोर्ट द्वारा जारी जमानती वारंट पर भी रोक लगा दी।
मालूम हो कि हाईकोर्ट ने आरोपी अधिकारियों से पूछा था कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना आरोप तय किया जाए। आदेश के बाद अपर महाधिवक्ता ने अधिकारियों को जमानत पर रिहा करने का अनुरोध किया। हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों अफसरों ने झूठा हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को गुमराह किया है। आदेश का पालन नहीं करने पर अधिकारी बिना किसी वैध वजह के अड़े हैं, जोकि अवमानना है। न्यायालय ने आगे कहा कि अफसरों ने कोर्ट से अपना पिछला आदेश वापस लेने की अर्जी दी है। आदेश का कौन-सा हिस्सा वापस लेना है, यह स्पष्ट नहीं है। कोर्ट के अनुसार अफसरों ने कहा कि 2018 के शासनादेश को संशोधित करने पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने अनुच्छेद 229 का मुद्दा उठाया, जो याचिका में नहीं है। यह भी कहा कि मुख्य सचिव ने 13 अप्रैल को बैठक की थी। महाधिवक्ता को आदेश का पालन करने की बात कही गई थी। इसके अलावा विधि विभाग के कार्यालय में 6 अप्रैल 2023 को सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को लाभ प्रदान करने के लिए प्रस्तावित सरकारी आदेश में संशोधन को वित्त विभाग की मंजूरी के लिए अग्रसारित किया गया था। इन तथ्यों को छिपा दिया गया। अतः अधिकारियों को अवमानना के आरोप में गुरुवार को 11 बजे कोर्ट में पेश होने को कहा गया था। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार तथा न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार (चतुर्थ) की खंडपीठ ने रिटायर्ड जजेस एसोसिएशन की याचिका पर दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की गई। सुनवाई की अगली तारीख तक इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ के दिनांक 4 अप्रैल 2023 और 19 अप्रैल 2023 के आदेशों पर रोक रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल इस आदेश को टेलीफोन और ईमेल के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को तत्काल अनुपालन के लिए सूचित करेंगे। यह मामला अब अगले शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
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