मॉब लिंचिंग: मुआवजा नीति में संशोधन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और राज्यों को नोटिस
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने देश में 'मॉब लिंचिंग' के शिकार लोगों के लिए समान और उचित मुआवजा नीति अपनाने की जनहित याचिका पर शुक्रवार को केंद्र और सभी राज्यों को नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की एक पीठ ने प्रगति और सुधार के लिए कुछ भारतीय मुसलमानों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करने की सहमति व्यक्त करते हुए नोटिस जारी किया।
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याचिका में दावा किया गया है कि घृणित अपराधों और 'मॉब लिंचिंग' के पीड़ितों के लिए पूर्व-अनुदान मुआवजा 'भेदभावपूर्ण और मनमाना" होने के साथ ही बेहद कम है। याचिका में दावा किया गया है कि ज्यादातर मामलों में मुआवजा मीडिया कवरेज, राजनीतिक अनिवार्यताओं और पीड़ित की धार्मिक पहचान जैसे बाहरी कारकों पर निर्भर करता है। याचिकाकर्ता ने तहसीन पूनावाला मामले (2018) में शीर्ष अदालत के फैसले के बाद बनाई गई मौजूदा मुआवजा योजनाओं में संशोधन के लिए निर्देश देने की मांग की थी।
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