अंतरिक्ष क्षेत्र में दबदबा

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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अंतरिक्ष के क्षेत्र में दुनिया का भरोसा भारत पर बढ़ रहा है। बीते एक दशक में विज्ञान व अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की कामयाबियों से भारत का सिर ऊपर उठा है। भारत के पोलर पीएसएलवी-सी55 के साथ शनिवार को सिंगापुर के दो सैटेलाइट को लांच किया गया।

इस लांचिंग के बाद 36 देशों से संबंधित ऑर्बिट में भेजे जाने वाले विदेशी सैटेलाइट की संख्या बढ़कर 424 पहुंच गई है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में इसरो ने जिस तरह से कुछ वर्षों में बड़ी-बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, उससे देश की क्षमता बढ़ी है। गौरतलब है विभिन्न देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां वर्ष 1999 से ही उपग्रह प्रक्षेपण में इसरो की मदद ले रही हैं। इसरो ने अभी तक जितने भी विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण किया है, वे सब सफल रहे हैं।

अंतरिक्ष अनुसंधान और उपग्रह प्रक्षेपण के क्षेत्र में इसरो फिलहाल कई योजनाओं पर एक साथ काम कर रहा है। निश्चित रूप से भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम दुनिया में सबसे कामयाब और कम लागत वाला है।  इसके बावजूद वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत का हिस्सा सिर्फ़ दो प्रतिशत है। दरअसल भारत में अंतरिक्ष के क्षेत्र को ध्यान में रखकर बनाए गए क़ानूनों का अभाव है।

उधर केन्द्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी समिति ने 6 अप्रैल को, भारत की अंतरिक्ष नीति को मंजूरी दे दी। इस नीति में शामिल अन्य बातों के अलावा स्पेस सेक्टर अर्थात् अंतरिक्ष क्षेत्र में अब निजी क्षेत्र को भी सक्रिय रूप से शामिल होने का अवसर प्रदान करने की व्यवस्था की गई है।

साफ़ है कि इसरो अब तक जिस उत्पादन और प्रक्षेपण की जिन गतिविधियों में उलझा हुआ था, उसे अब पूरी तरह से निजी क्षेत्र के नियंत्रण में सौंप दिया जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष नीति के विश्लेषक इस तरह के बदलाव की लंबे समय से पैरवी करते आ रहे थे। अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की बढ़ी हुई भूमिका के कारण अब इसरो को उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान, विकास और अंतरिक्ष अन्वेषण सहित ऐसे अन्य गैर-वाणिज्यिक मिशन जैसे पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने का पर्याप्त मौका मिलेगा।

इसरो की सफलता के पीछे यकीनन देश के वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों की विशेष दक्षता, कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता शामिल है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकों की इस कामयाबी को देखते हुए, सरकार को भी इस क्षेत्र में अब ज्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है। भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का अगुवा बनने की ओर अग्रसर है। क्योंकि देश में सस्ती टेक्नोलॉजी, तेजी से बढ़ती स्टार्ट-अप संस्कृति, युवाओं की विशाल आबादी और जरूरी तकनीकी जानकारी और कौशल मौजूद है।