शासन ने बड़ी घटनाओं को देखकर Kanpur के लिए जारी किए आदेश, अब थाने के गेट पर बनेंगे बंकर, तैनात रहेंगे कमांडो…
शहर में हुई बड़ी घटनाओं के बाद शासन ने कानपुर के लिए आदेश जारी किया।
शहर में हुई बड़ी घटनाओं के बाद शासन ने कानपुर के लिए आदेश जारी किया। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील थाने हाईटेक होंगे। थाने के गेट पर बंकर बनेंगे। जिसमें कमांडो तैनात होंगे।
कानपुर, अमृत विचार। कानपुर कमिश्नरेट का गठन होने के बाद आउटर खत्म करके अब कुल 50 थाने हो गए हैं। बढ़ती घटनाओं को लेकर शहर में संवेदनशील और अतिसंवेदनशील थानों को चिह्नित कर इन्हें हाईटेक बनाने का आदेश शासन ने जारी किया है।
पुलिस के भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि शासन के ब्लू प्रिंट के अनुसार शहर के संवेदनशील और अतिसंवेदनशील थानों के गेट पर परिपक्व पुलिस कर्मी यानी कमांडो तैनात किए जाएंगे। ये कमांडो पीएसी का जवान होगा। थाने के गेट पर बने बंकर में तैनात ये कमांडो हाईटेक असलहों से लैस होंगे। थाने की जद में आने वाला हर व्यक्ति कैमरे की निगाह में होगा। हर किसी को मालखाने और इंस्पेक्टर के रूम में जाने की परमिशन नहीं होगी।
महिलाओं की हेल्प डेस्क की भांति अब पुरुषों की शिकायत के लिए हेल्प डेस्क होगी। जो भी जांच होगी, उसकी जानकारी डेस्क पर मौजूद सब इंस्पेक्टर देगा। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील थानों का अलग कंट्रोल रूम होगा। जिससे इलाके के मुख्य स्थानों और थाने के मुख्य स्थानों पर नजर रखी जा सकेगी। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी थाना प्रभारी की होगी।
अतिसंवेदनशील जिले में शामिल है कानपुर
कानपुर को अतिसंवेदनशील जिले में शासन ने तीन जून की हिंसा के बाद शामिल कर लिया था। पुलिस अधिकारियों की जांच में सामने आया था कि कानपुर के बहाने देश को सांप्रदायिक हिंसा में जलाने की तैयारी थी। इसके पहले एनआरसी में हुए विवाद में भी कानपुर में भारी बवाल हुआ था। जाजमऊ इलाके से आतंकियों से जुड़े कई लोग पकड़े गए थे। इसके अलावा रावतपुर थानाक्षेत्र में जुलूस के दौरान तमाम बवाल हुआ करते हैं। जिसकी वजह से लॉ एंड ऑर्डर प्रभावित होता है। इन्हीं सब मामलों को लेकर शासन शहर की सुरक्षा को लेकर काफी संजीदा है। हालांकि, कमिशनरेट का गठन होने के बाद पांच नए थाने मिले। लेकिन अभी और थाने और चौकियां मिलनी हैं।
इन थानों को किया जा सकता हाईटेक
थाना जाजमऊ :(अतिसंवेदनशील) : मिश्रित आबादी वाला यह इलाका आतंक से जुड़े लोगों और अपराधियों के रुकने का शुरू से मुफीद स्थान रहा है। यहां रहकर कई अजनबी मजदूरी करते हैं, और देश विरोधी गतिविधियों में भी संलिप्त रहते हैं। प्रयागराज-वाराणसी होते हुए नेपाल और लखनऊ गोरखपुर होते हुए नेपाल जाने के रास्ते यहां से बहुत आसान हैं। चकेरी एयरपोर्ट यहां से करीब है और लखनऊ एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी भी यहां से आसान है, इसलिए जाजमऊ अतिसंवेदनशील है।
थाना कैंट : (अतिसंवेदनशील) : कैंट थानाक्षेत्र अंतर्गत आर्मी और एयरफोर्स के हेडक्वार्टर हैं। रक्षा मंत्रालय के डीएमएसआरडीई और पैराशूट फैक्ट्री के साथ आर्मरी की एक यूनिट भी है। देश की सुरक्षा की दृष्टि से ये इलाका अति महत्वपूर्ण हैं। देश के अत्यंत महत्वपूर्ण और गुप्त दस्तावेज प्राप्त करने के लिए देश के दुश्मन अक्सर कोशिश करते रहते हैं। प्रतिसिद्ध स्थान होने की वजह से यहां स्थानीय पुलिस के साथ- साथ आर्मी का मूवमेंट भी रहता है। इसलिए ये थाना अतिसंवेदनशील है।
थाना कर्नलगंज :(अतिसंवेदनशील) : सभी जातियों की मिश्रित आबादी होने की वजह से कर्नलगंज थाना अतिसंवेदनशील माना जाता रहा है। इसकी सीमा से बजरिया और रायपुरवा के साथ सीसामऊ थाने की सीमा भी लगती है। चमनगंज और बेकनगंज की सीमा भी इस थाने से लगती है। सद्भावना चौकी यानी परेड चौराहे से ही तीन जून को होने वाले विवाद की शुरुआत हुई थी। जिसमें पथराव, फायरिंग और मारपीट हुई थी। वहीं इस इलाके से पीएफआई, सिमी समेत तमाम देश विरोधी गतिविधियों में शामिल एजेंसियों का मूवमेंट भी रहता है। इस वजह अतिसंवेदनशील माना गया है। वहीं नई सड़क करीब होने की वजह से अनवरगंज थाना भी अतिसंवेदनशील की श्रेणी में है। जहां दुनिया भर का जरायम होता रहता है।
थाना कल्याणपुर और रावतपुर :( अतिसंवेदनशील) : इन दोनों थानाक्षेत्रों में मिश्रित आबादी रहती है, लिहाजा इन थानों के फोर्स को हमेशा अलर्ट रहना पड़ता है। विशेष तौर पर त्योहारों पर सतर्कता बढ़ा दी जाती है। जुलूस के दौरान यहां अक्सर विवाद होता रहता है। छोटी सी बात पर शुरू हुआ विवाद बड़े सांप्रदायिक तनाव को जन्म देता है। लिहाजा ये थाने भी अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। वहीं दक्षिण की बात की जाए तो नौबस्ता थाने के मछरिया और बाबूपुरवा थाने का ईदगाह और बेगमपुरवा अति संवेदनशील हैं। मिश्रित आबादी के साथ-साथ यहां स्लीपर सेल्स भी अपना ठिकाना बनाए हैं।
थानों में दिखेंगे ये बदलाव
- गेट और छत पर दिखेंगे सुरक्षाकर्मी।
- थानों में लगाए जाएंगे सीसीटीवी।
- थानों में बनाया जाएगा सीसीटीवी कंट्रोल रूम।
- इलाकों में निगरानी के लिए लगाए जाएंगे कैमरे।
- गश्त के लिए बनाई जाएंगी स्पेशल टीमें।
- थाना पुलिस को दिए जाएंगे हाईटेक असलहे।
- थानों को दिए जाएंगे नए वाहन।
- धार्मिक स्थलों के बाहर लगाए जाएंगे कैमरे।
- संदिग्ध लोगों की लगातार होगी सुरागसी।
