बदायूं: चार नेताओं की दावेदारी, सपा को पड़ सकती है भारी

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Edited By Amrit Vichar
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चारों बता रहे खुद को सपा का समर्थित, पार्टी नेतृत्व ने नहीं किया किसी को घोषित

बदायूं, अमृत विचार। राजनीति में कोई किसी का स्थाई मित्र या शत्रु नहीं होता, निजी लाभ के लिए राजनेता किसी भी स्तर पर जा सकते हैं। ऐसे राजनेताओं के लिए पार्टी या संगठन कोई मायने नहीं रखता है। केवल स्वार्थ की सिद्धि के लिए राजनीति करते हैं।

कुछ ऐसा ही जिले में निकाय चुनाव में देखने को मिल रहा है। कई स्थानों पर एक ही पार्टी के पदाधिकारी चुनावी समर में कूद पड़े हैं। सबसे अधिक संग्राम नगर पालिका परिषद बदायूं के अध्यक्ष की सीट पर देखने को लेकर सामने आया है। यहां पर समाजवादी पार्टी से जुड़े चार नेताओं ने अपने परिवार की महिलाओं का नामांकन कराया है।

सपा ने अपना सिंबल इनमें से किसी को नहीं दिया है, लेकिन चारों खुद को सपा का समर्थित बता रहे हैं। नेताओं के बीच खींचतान के चलते समाजवादी पार्टी से जुड़े मतदाताओं के सामने असमंजस की स्थिति है। सूत्रों के मुताबिक समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेता एक प्रत्याशी को चुनाव मैदान में रहने के लिए आपसी सहमति बनाने की कोशिश में हैं। मगर बुधवार देर शाम तक आपसी सहमति बनने के कोई आसार नजर नहीं आए। इससे पार्टी ने भी किसी को अपना समर्थन देने का ऐलान अभी तक नहीं किया है। 

दरअसल वर्ष 2024 में लोकसभा का चुनाव होना है। उस लिहाज से स्थानीय निकाय चुनाव को क्वार्टर फाइनल के रूप में देखा जा रहा है। प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी काफी मजबूत स्थिति में है। इसकी वजह यह भी है कि केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। उधर, भाजपा विरोधी भी स्थानीय निकाय चुनाव गंभीरता से ले रहे हैं। क्योंकि इस चुनाव के जरिए विपक्षी दल वार्ड स्तर पर अपना संगठन मजबूत कर सकते हैं। प्रदेश में सपा दूसरे नंबर की पार्टी मानी जा रही है।

निकाय चुनाव में खासकर नगर पालिका व नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद का टिकट लेने के लिए कई-कई दावेदार सामने आने लगे। जिले में पार्टी नेताओं के बीच बिखराव न हो इसलिए शीर्ष नेतृत्व ने किसी को भी सपा का सिंबल नहीं दिया। 

बदायूं शहर में समाजवादी पार्टी से जुड़े चार प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें पूर्व विधायक आबिद रजा की पत्नी व पूर्व चेयरमैन फात्मा रजा, वरिष्ठ सपा नेता फकरे अहमद शोभी की पत्नी फायजा नकवी, समाजवादी महिला सभा की प्रदेश सचिव इंदू सक्सेना और वरिष्ठ नेता डॉ. शकील के परिवार की नाजमी पत्नी शफी अहमद ने अपना नामांकन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कराया है, लेकिन चारों खुद को सपा समर्थित होने दावा कर रहे हैं।

मगर चार दावेदारों के नामांकन कराने से सपा का शीर्ष नेतृत्व चिंतित है। वजह यह कि चारों के चुनाव मैदान में होने से सपा कमजोर नजर आएगी और इसका फायादा सीधे तौर पर भाजपा प्रत्याशी को मिलेगा। भाजपाई भी चाहते हैं कि चारों  चुनाव मैदान में डटे रहें, जिससे भापजा प्रत्याशी की जीत सुनश्चित हो सके। हालांकि अब पार्टी इस बात का प्रयास कर रही है कि किसी तरह आपसी सहमति बनाकर एक ऐसे प्रत्याशी को मैदान में रखा जाए जो भाजपा को सीधे टक्कर दे सके या हराने में सक्षम हो।

अलविदा की नमाज के दिन जमा मस्जिद के पास पूर्व विधायक आबिद रजा और वरिष्ठ सपा नेता फकरे अहमद शोभी के बीच खुलेआम सड़क पर तू-तू, मैं-मैं हुई थी। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे से गाली-गलौज भी की थी, जिसका सोशल मीडिया पर वीडियो भी वायरल हुआ था। इन दोनों नेताओं बीच हुए विवाद की शहर में जबरदस्त चला रही थी। दूसरे सड़क पर हुए विवाद के बाद दोनों के बीच दूरियां और बढ़ गईं। पार्टी सूत्र बताते हैं की सपा के चारों नेता खुद को विजयी प्रत्याशी मानकर अपनी-अपनी जिद पर अड़े हैं। इससे आम सहमति की बनने की बात कहना अभी जल्दवाजी होगी। 

पार्टी ने अभी किसी को समर्थन नहीं दिया है। आपसी सहमति बनाने के जिए प्रयास जारी है। पार्टी नेता और कार्यकर्ता मिल जुलकर बातचीत कर रहे हैं। बाकी राष्ट्रीय अध्यक्ष का जैसा आदेश होगा उसका पालन किया जाएगा---आशीष यादव, जिलाध्यक्ष।

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