Mahoba News : कुत्तों के डर से बच्चों को स्कूल भेजने जाते अभिभावक, कन्नौज की घटना से लिया सबक

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Edited By Amrit Vichar
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महोबा में कुत्तों के डर से बच्चों को स्कूल भेजने जाते अभिभावक।

कन्नौज की घटना के बाद अभिभावक बच्चों को अकेला नहीं छोड़ते। महोबा में कुत्तों के डर से बच्चों को अभिभावक स्कूल भेजने जाते है।

महोबा, अमृत विचार। शहर में घूम रहे आवारा कुत्ते अब जानलेवा बन गए हैं। कुत्तों के आतंक से माता पिता अब बच्चों को अकेला स्कूल भेजने से डर रहे हैं। स्कूली बसों और अन्य वाहनों से स्कूल जाने वाले बच्चों को माता पिता बस के आने वाले स्थल तक छोड़ने और लेने जा रहे हैं।कोई भी अभिभावक अब बच्चों को अकेले छोड़ने के मूड में नहीं है। हर पल छोटे-छोटे बच्चों का ख्याल रखा जा रहा है। जनपद कन्नौज में कुछ दिन पहले एक बच्चे को कुत्तों ने नोंचकर मार डाला।

इस घटना के बाद से चारों तरफ लोग कुत्तों से डरने लगे हैं। कुत्तों के झुंड देखकर अब बच्चे तो दूर युवा और बुजुर्ग भी किनारा करके निकल रहे हैं। हर इंसान को कहीं कुत्ता हमला न कर दे,इसका डर सता रहा है।कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनते ही लोग सहम जाते हैं मां बाप भी तत्काल अपने बच्चों की तलाश करने लगते हैं। जगह-जगह झुंड बनाकर कुत्तों के घूमने से लोग खासा आशंकित है। रात में या मॉर्निंग वॉक पर निकलने वाले लोग अब हाथ में डंडा लेकर निकलते हैं। उन्हें कुत्तों की हम लोग का डर सताने लगा है।

सालों से हर रोज जिला अस्पताल में कुत्ते के काटने पर इंजेक्शन लगवाने आते हैं, लेकिन कभी लोग कुत्तों के काटने के बाद भी इतना भयभीत नहीं हुए हैं। जितना कि आजकल कुत्तों से डरे हुए हैं। कुत्तों को देखते ही लोगों की सांसे थम जाती है। बच्चे तो चीखने चिल्लाने लगते हैं। बच्चों की चीख पुकार सुनते ही गा4 से बाहर निकल पड़ते हैं। यही वजह है कि आजकल सभी लोग कुत्तों से सतर्कता बरत रहे हैं। सड़कों पर बैठे कुत्तों को देखकर लोग चुपचाप निकल जाते हैं।डंडा लिए होने के बाद भी उनके अंदर भय बना रहता है।आजकल के कुत्ते जानलेवा बन गए हैं। इसीलिए लोगों में डर बढ़ रहा है।

कुत्तों  के डर से दूसरे रास्ते से निकलते हैं लोग

कुत्तों के आतंक से चारों तरफ लोग सैनी हुए हालात यह है कि कुत्तों के झुंड को देखकर अब लोग रास्ता बदलकर निकलते हैं जिन मार्गों पर कुत्ते बैठे होते हैं लोग दूसरा मार्ग तलाश कर लेते हैं उन्हें कुत्तों के हमले का डर सता रहा है जब बड़ों का यह आलम है तो छोटे बच्चों का आलम क्या होगा इसी से अंदाज लगाया जा सकता है।

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