विश्व अस्थमा दिवस : अस्थमा के मरीजों के लिए नई गाइडलाइन जारी, इन्हेलर के संबंध में यह बात आई सामने
लखनऊ, अमृत विचार। अस्थमा का इलाज विशेषकर सही इलाज जरूरी है। वहीं 17 फीसदी अस्थमा से पीड़ित मरीजों को केवल विशेषज्ञ चिकित्सक से ही इलाज कराना चाहिए। यह कहना है किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.सूर्यकांत का। वह मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस के अवसर पर पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में आयोजित जागरुकता कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
प्रो.सूर्यकांत ने कहा कि अस्थमा सांस की बीमारी है जो श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है, अस्थमा पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में मुश्किल होती है। इससे घरघराहट, खांसी, सीने मे जकड़न और सांस लेने में तकलीफ आम बात है। अस्थमा एक आम बीमारी है, जो दुनिया भर में अनुमानित 34 करोड़ लोगों को प्रभावित करती है। अस्थमा से पीड़ित ज्यादातर मरीजों का इलाज फिजिशियन कर सकते हैं, लेकिन गंभीर मामलों में करीब 17 फीसदी मरीजों को चेस्ट फिजिशियन से ही इलाज लेना चाहिए। तभी उनको राहत मिलेगी। इसके लिए आज ही ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (जीआईएनए) ने गाइड लाइन जारी की है।
डॉ.सूर्यकांत ने बताया कि जारी गाइड लाइन के अनुसार अस्थमा के इलाज में विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज लेना, हर उम्र के मरीजों का इन्हेलर अलग-अलग होना, चिकित्सक की सलाह पर दवा और इन्हेलर का इस्तेमाल। यानी की अस्थमा के इलाज के लिए नई गाइडलाइन जारी हुई है। इसी के हिसाब से मरीजों को इलाज लेना चाहिए।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अस्थमा के मरीजों को इन्हेलर का इस्तेमाल लगातार करना चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए की इन्हेलर का इस्तेमाल बीच में अपने मन से मरीज रोक दे,नहीं तो इसका नुकसान मरीजों का उठाना पड़ता है।
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