बरेली: ऐसे सिकुड़ता चला गया डेलापीर तालाब का अस्तित्व
बरेली, अमृत विचार। शासन ने वर्ष 1952 (फसली1359) से राजस्व अभिलेखों में दर्ज तालाबों का रिकार्ड तलब किया है। पांच बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट में शासन ने तालाबों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में भी जानकारी भेजने के निर्देश दिए हैं। इसका जवाब भेजने को लेकर अधिकारी भी उलझे हुए हैं। …
बरेली, अमृत विचार। शासन ने वर्ष 1952 (फसली1359) से राजस्व अभिलेखों में दर्ज तालाबों का रिकार्ड तलब किया है। पांच बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट में शासन ने तालाबों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में भी जानकारी भेजने के निर्देश दिए हैं। इसका जवाब भेजने को लेकर अधिकारी भी उलझे हुए हैं।
क्योंकि तालाबों पर कब्जा होने के कई मामलों की जांच शासन स्तर से बैठी है। कई बड़े तालाबों को मुक्त कराने के संबंध में सालों से राजनीति हो रही है। सिस्टम की साठगांठ से तालाबों पर कब्जा कर मकान खड़े कर दिए गए। इस वजह से स्थानीय प्रशासन ठोस कार्रवाई भी नहीं कर पाया है। हालांकि, रिपोर्ट भेजने के लिए सभी तहसीलों में तालाबों का रिकार्ड ढूंढा जा रहा है। बताते हैं कि सरकार तालाबों को मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए तालाबों की मौजूदा स्थिति जानने में लगी है।
ताकि तालाबों से अतिक्रमण हटवाया जा सके। राजस्व परिषद सचिव एवं आयुक्त की ओर से जिलाधिकारी के नाम से चिट्ठी भेजी गई है। 18 अगस्त को पहुंची चिट्ठी में अतिक्रमित से मुक्त तालाब, शेष तालाब, इनका मौजूदा रकबा, कब्जा मुक्त के बाद खुदवाए तालाबों की संख्या और कब्जा करने वालों पर की गई कार्रवाई के बिंदुओं का विवरण मांगा है। यह भी कहा है कि तालाबों पर हो रहे अतिक्रमण तत्काल हटवाए जाने की संस्तुति सहित तहसीलवार सूचना राजस्व परिषद को भेजें। चिट्ठी का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी नितीश कुमार ने अपर जिलाधिकारी प्रशाासन वीके सिंह और डीएलआरसी को रिपोर्ट तैयार कराने के निर्देश दिए हैं।
बरेली में तालाबों पर कब्जे का बड़ा खेल
बरेली में तालाबों पर कब्जे का बड़ा खेल हुआ है। नगर निगम, नगर पालिका, राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों से साठगांठ कर भू-माफिया ने बड़े-बड़े तालाबों का अस्तित्व मिटा दिया। शहर के नजदीक कई तालाबों पर ऊंची-ऊंची बिल्डिंगें खड़ी हैं। हरुनगला, रिठौरा क्षेत्र के कई तालाबों पर कब्जे निकले हैं। सदर तहसील ने हाल ही में तालाबों से कब्जे हटवाए हैं।
डेलापीर तालाब का अस्तित्व ही मिटने को आया
राजस्व अभिलेखों में ग्राम विहारमान नगला तहसील बरेली के गाटा संख्या 133, रकबा 1.695 हेक्टेयर भूमि का डेलापीर तालाब वर्ष 1951-52 से भी पहले का है। यह प्राचीन काल से चला आ रहा है। दशकों से पहले शहर के कुछ भूमाफिया की तालाब पर ऐसी नजर पड़ी कि वर्तमान में तालाब का अस्तित्व मिटने की स्थिति में है। तालाब की भूमि पर ऊंची-ऊंची बिल्डिंगें खड़ी हैं। नगर निगम के जिम्मेदारों से साठगांठ कर तालाब की भूमि पर दशकों से भूमाफिया कब्जे करते चले आए। इसका मामला शासन में पहुंचा हुआ है। मार्च माह में राजस्व परिषद सचिव ने बरेली डीएम से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी लेकिन मामला फाइलों में कैद है।
नरियावल क्षेत्र में 114 तालाबों को पाटकर बसा दी टाउनशिप
कुछ साल पहले बरेली विकास प्राधिकरण, राजस्व विभाग से साठगांठ कर कुछ बिल्डरों ने नरियावल क्षेत्र में 114 तालाबों की भूमि पर पहले कब्जा किया। उसके बाद भूमि पर टाउनशिप बसाने के लिए साठगांठ कर गलत तरीके से नक्शा पास कराया था। इसके बाद टाउनशिप बसा दी।
मामले की शिकायतें शासन स्तर पर हुई। जुलाई माह में इसी प्रकरण में मंडलायुक्त ने जांच कराई। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि 114 तालाबों को पाटकर टाउनशिप बसाई गई थी। इसमें मंडलायुक्त ने बीडीए के कई अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी थी लेकिन शासन स्तर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
