मणिपुर में हिंसा
मणिपुर में मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) में शामिल करने की मांग को लेकर जारी आंदोलन अब हिंसक रूप ले चुका है। शांति बहाली के लिए सेना और असम राइफल्स की तैनाती कर दी गई है। बॉक्सिंग चैंपियन मैरी कॉम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि मेरा राज्य जल रहा है मोदी जी मदद कीजिए। दरअसल आल इंडिया स्टुडेंट्स यूनियन आॅफ मणिपुर ने बुधवार को मैतेई समुदाय को एसटी में शामिल करने की मांग का विरोध करते हुए एकजुटता मार्च का आयोजन किया था। इस दौरान राज्य में कई स्थानों पर हिंसक झड़पें हुईं। राज्य के आठ जिले हिंसा की चपेट में आ गए हैं।
राज्य में स्थिति तनावपूर्ण है। मणिपुर में मैतई, नागा और कुकी समुदाय के लोग रहते हैं। इनमें नागा और कुकी को आदिवासी समुदाय का दर्जा मिला हुआ है जबकि मैतई को गैर-आदिवासी अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है। विवाद की वजह ये है कि मणिपुर के कानून के अनुसार सिर्फ आदिवासी समुदाय अनुसूचित जनजाति के ही लोग पहाड़ी इलाकों में बस सकते हैं। इसलिए मैतई समुदाय के लोग अपना दर्जा अनुसूचित जाति से हटाकर अनुसूचित जनजाति करने की मांग कर रहे हैं, ताकि वे लोग भी पहाड़ी इलाकों में जाकर बस सकें।
मैतई लोगों की मांग का पहाड़ी क्षेत्र के निवासी इस आधार पर विरोध कर रहे हैं कि इससे उनके संवैधानिक सुरक्षा उपाय प्रभावित होंगे। इससे पहले राज्य में 28 अप्रैल को भी हिंसा हुई थी। यहां की हिंसक वारदातों ने मुख्यमंत्री बीरेन सिंह की सरकार के खिलाफ प्रदेश में माहौल बना दिया है। राज्य सरकार से आदिवासी समुदाय के लोग काफी नाराज हैं। स्वतंत्रता से पहले मणिपुर के राजा ने इंफाल घाटी और पहाड़ी जिलों को प्रशासित करने के लिए दो कानून बनाए थे।
एक घाटी में लोगों के लिए मणिपुर राज्य संविधान अधिनियम और दूसरा पहाड़ियों में रहने वालों के लिए मणिपुर राज्य पहाड़ी (प्रशासन) विनियमन। दुर्भाग्यपूर्ण है कि मणिपुर के भारतीय संघ में शामिल होने के वर्षों बाद भी दोनों क्षेत्रों के प्रशासन में अंतर बना रहा। जबकि राज्य सरकार घटना को समाज के दो वर्गों के बीच प्रचलित गलतफहमी का परिणाम बता रही है। स्वतंत्रता के बाद के अनुभव में दशकों की राजनीतिक उपेक्षा ने राज्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।
याद रखना होगा 1964 के बाद से, मणिपुर जातीय आधार पर विभाजित संगठनों द्वारा भड़काए गए विद्रोह का शिकार रहा है। फिलहाल मणिपुर में वर्तमान स्थिति की यथास्थिति का मूल्यांकन करना अत्यावश्यक है। सरकार को स्थिति नियंत्रित करने के लिए तेजी से कदम उठाने होंगे। राज्य में स्थायी शांति लाने के लिए जवाबदेह और पारदर्शी शासन सुनिश्चित करना होगा।
