अगर करते हैं पान मसाला और तंबाकू का सेवन तो हो जायें सावधान! खून की इस बीमारी से हो सकते हैं पीड़ित
लखनऊ, अमृत विचार। पान, मसाला और तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों में खून और प्लेटलेट्स की कमी हो सकती है। यह जानकारी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय स्थित क्लीनिकल हिमेटोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.अनिल कुमार त्रिपाठी ने दी। वह केजीएमयू मेडिसिन विभाग की तरफ से शनिवार को आयोजित पीजी मेडिसिन अपडेट कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
प्रो.एके त्रिपाठी ने बताया कि पान मसाला और तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों में बिटामिन बी-12 की कमी हो जाती है। जिससे खून की कमी और प्लेटलेट्स की कमी शरीर में देखी जाती है। ऐसे में पान मसाला और तंबाकू का सेवन करने से व्यक्ति को बचना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि कई बार जांच के दौरान शरीर में प्लेटलेट्स की कमी रिपोर्ट दर्शाती है। इसका एक कारण मशीन से हुई जांच भी हो सकती है। इसके पीछे का एक कारण प्लेटलेट्स का साइज भी हो सकता है। कुछ लोगों में प्लेटलेट्स का साइज बड़ा होता है। जिसका काउंट मशीन ठीक तरह से नहीं कर पाती है। अच्छे परिणाम के लिए मशीन के अलावा मैनुअल भी प्लेटलेट्स जांच करानी चाहिए। साथ ही जांच रिपोर्ट ठीक आये इसके लिए जांच के लिए रक्त का नमूना लेने के तुरंत बाद ही जांच कर लेनी चाहिए। फ्रिज में नमूना रखने से जांच रिपोर्ट में ठीक नहीं आती है।
30 हजार से कम हो प्लेटलेट्स
प्रो.एके त्रिपाठी के मुताबिक शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या 30 हजार या उससे कम होने पर ही प्लेटलेट्स चढ़वाना चाहिए। इससे अधिक प्लेटलेट्स की संख्या होने पर चिकित्सक की सलाह पर ही इलाज कराना चाहिए। कई बार प्लेटलेट्स 50 हजार होने के बाद भी घबराये रहते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।
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एसजीपीजीआई के डॉ. नारायण प्रसाद ने किडनी रोग के विभिन्न स्पेक्ट्रम के बारे में बात करते हुये कहा कि पेशाब में खून आना एक आपात स्थिति हो सकती है और उसी के अनुसार निपटा जाना चाहिए।
प्रोफेसर अमित गोयल ने वायरल हेपेटाइटिस बी और सी के हालिया अपडेट पर प्रकाश डाला और बताया कि रोगी को उपचार के लिए कब विचार करना चाहिए और लीवर की विफलता का निदान सरल उपायों से किया जा सकता है।
डॉ. हरदीप मल्होत्रा, डॉ. अखिल शर्मा, डॉ. अभिषेक, डॉ. नीरज कुमार, डॉ. आनंद, डॉ. सर्वेश कुमार ने न्यूरोलॉजिकल रोग के साथ हृदय रोग के रोगी के बारे में चर्चा की और जूनियर डॉक्टरों द्वारा सामना किए जाने वाले कठिन मामलों का प्रबंधन करने के बारे में अपनी विशेषज्ञ राय दी।
इस सम्मेलन में पूरे उत्तर प्रदेश यूपी मेडिकल काउंसिल के लगभग 300 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सीएमई के मुख्य अतिथि डॉ. ज्योतिर्मय पाल थे और उन्होंने इस तरह के कार्यक्रम के नियमित संचालन पर जोर दिया। उन्होंने इस तरह के इंटरैक्टिव और शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए मेडिसिन विभाग के प्रयासों की भी सराहना की।
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