रामपुर: इस्लामी देशों में भी नहीं रजा लाइब्रेरी जैसा ज्ञान का खजाना- अल्हावास
इराक के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन व राजनैतिक सचिव अली अब्दुल लतीफ अल्हावास पहुंचे रामपुर
रामपुर, अमृत विचार। भारत में इराक के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन व राजनैतिक सचिव अली अब्दुल लतीफ अल्हावास ने कहा है कि इस्लामी देशों में भी रजा लाइब्रेरी जैसा ज्ञान का खजाना नहीं है। इराकी राजनयिक रविवार को पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां के आमंत्रण पर रामपुर पहुंचे।
इराक के राजनयिक अली अब्दुल लतीफ अल्हावास का नूर महल पहुंचने पर पूर्व मंत्री नवेद मियां ने फूल मालाएं पहनाकर स्वागत किया। इराकी राजनयिक नवेद मियां के साथ जामा मस्जिद, इमामबाड़ा किला, खासबाग और चाकू चौक देखने गए।
उन्होंने रामपुर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद की सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहरों की प्रशंसा की। राजनयिक रजा लाइब्रेरी में काफी समय तक रहे। उन्होंने हजरत अली, इमाम जाफर सादिक और इब्ने मुकला के हाथ से लिखे गए कुरआन मजीद का अवलोकन किया।
जामीउत तवारीख, अजाईबुल मखलूकात और तहकीक मालिल हिंद समेत कई पांडुलिपियों को भी देखा। नवेद मियां ने इराकी राजनयिक को अरबी मख्तूतात का इंडेक्स और दीवान ए बाबर की प्रति भेंट की। राजनयिक ने रजा लाइब्रेरी में अरबी संग्रह को देखकर हैरत जताई।
उन्होंने कहा कि रजा लाइब्रेरी जितना महत्वपूर्ण इस्लामी संग्रह मुस्लिम देशों में भी नहीं है। उन्होंने रजा लाइब्रेरी आने पर खुद को सौभाग्यशाली बताया और खुशी जाहिर की। इस मौके पर पूर्व मंत्री नवेद मियां के पीआरओ काशिफ खां, लाइब्रेरियन अबुसाद इस्लाही, अरुण सक्सेना, नवेद कैसर, मुख्तार अहमद, इरशाद नदवी, आरिफ हुसैन आदि मौजूद रहे।
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