अयोध्या की राह में हर कदम पर अव्यवस्था का डंक, पढ़िए क्या कह रही जनता
रामपथ के अव्यवस्थित निर्माण ने बढ़ाई लोगों की मुसीबतें
अयोध्या , अमृत विचार। ' भईया क्या कहें, अयोध्या जाना अब पहाड़ चढ़ने जैसा हो गया है। नियावां से आगे बढ़ते ही ऐसा जाम लगता है कि छक्के छूट जाते हैं, बाइक तो दूर पैदल चलना मुश्किल है। यह कहना है अंगूरीबाग के सिद्धेश्वर पाठक का।
आवास विकास कालोनी के अशोक दूबे कहते हैं कि रामपथ तो जब बनेगा तब बनेगा, वर्तमान में स्थिति बहुत भयावह है। निर्माण को लेकर कोई प्लान नहीं दिख रहा है, जैसे मर्जी आ रही है कार्य हो रहा है। चौक निवासी शफीक अंसारी कहते हैं कि नयाघाट से सहादतगंज तक हो रहा रामपथ का निर्माण कार्य का ढंग अव्यवस्थित है। मुख्यमार्ग पर घंटों जाम लगा रहता है। यहां यातायात नियंत्रित करने वाले कहीं दिखाई नही देते हैं।
गुदड़ीबाजार के रामकुमार वर्मा कहते हैं कि निर्माण कार्य कराने वालों को चाहिए कि एक तरफ का निर्माण कार्य पूरा कर लें फिर दूसरी तरफ खुदाई करें। अधिकारी मौके पर आकर स्वयं नही देखते हैं। एसी कमरों में बैठकर केवल लम्बे - चौडे़ निर्देश जारी कर रहे हैं।
जी हां निर्माणाधीन रामपथ को लेकर लोगों की तकलीफ कुछ इस तरह से सामने आ रही है। लोगों का कहना है कि विकास तो ठीक है लेकिन व्यवस्थित तरीके से हो यह भी जरूरी है। जिस तरह से निर्माण का काम चल रहा है वह लोगों के लिए संकट ही है। करीब 13 किलोमीटर के रामपथ के निर्माण को लेकर सआदतगंज, सिविल लाइन्स, रिकाबगंज, नियावां, गुदड़ीबाजार, खवासपुरा, साहबगंज, बेनीगंज से लेकर नयाघाट तक अजब गजब तरीके से कार्य किया जा रहा है। हर दो सौ मीटर पर एक ओर ही नहीं दोनों ओर यूटिलिटी डक्क बने हुए हैं। बैरिकेडिंग लगाई गई है, जगह - जगह मिट्टी के टीले बन गए हैं। नतीजा अयोध्या आना और जाना दोनों दुरुह हो गया है। मानीटरिंग नाम की कोई व्यवस्था नहीं दिख रही है। कार्यदायी एजेंसी के जिम्मेदार भी लापरवाही बरती रहे हैं।
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यह हाल तब है जब रोज यहां वीवीआईपी हस्तियों का दौरा होता है। लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री को स्वयं मौके का निरीक्षण करना चाहिए ताकि हकीकत तो पता चले। गंभीर बात यह है कि अब तक कई हादसे तक हो चुके हैं लेकिन जिम्मेदारों की नींद नहीं टूट रही है।
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