UP Nikay Chunav 2023 : नगर निकाय चुनाव में अखिलेश के बम की परीक्षा कल, नतीजा 13 को
UP Nikay Chunav 2023 सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कल आएंगे कानपुर।
UP Nikay Chunav 2023 सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव प्रत्याशियों के पक्ष में वोट मांगने के लिए कल आएंगे कानपुर। हालांकि परीक्षा का नतीजा 13 मई को मतगणना के बाद निकलेगा जो 2024 में लोकसभा चुनाव में सपा के प्रदर्शन की इबारत लिखेगा।
कानपुर, [महेश शर्मा]। UP Nikay Chunav 2023 नगर निकाय चुनाव में टिकट वितरण में सोशल इंजीनियरिंग का पूरा ध्यान रखते हुए चुनाव मैदान में वोट मांग रहे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव मंगलवार को कानपुर में परीक्षा देने आएंगे।
हालांकि परीक्षा का नतीजा 13 मई को मतगणना के बाद निकलेगा जो 2024 में लोकसभा चुनाव में सपा के प्रदर्शन की इबारत लिखेगा, पर उनकी सोशल इंजीनियरिंग की बयार का मतदाताओं पर क्या असर है, इसका संकेत जरूर मिल सकता है। इस परीक्षा में वह अकेले नहीं उनकी पत्नी सांसद डिम्पल यादल और चाचा शिवपाल यादव भी अलग-अलग समय पर रोड शो, सभा, संपर्क करने के लिए आएंगे।
कानपुर में सपा मेयर प्रत्याशी वंदना वाजपेयी हैं। उनके पति आर्यनगर से दो बार के विधायक अमिताभ वाजपेयी हैं। उनका निर्वाचन क्षेत्र ब्राह्मण, वैश्य और मुस्लिम मतदाता बहुल कहा जाता है। तेवर के साथ जनता के बीच मौजूदगी से वाजपेयी की लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ता है जिसका लाभ उनकी पत्नी वंदना वाजपेयी को मिल सकता है।
तभी तो एक पार्टी की प्रत्याशी ने डमी वंदना वाजपेयी को फाइनेंस करके मेयर चुनाव में खड़ा कर सपा की वंदना के रास्ते में कांटा बिछाने का प्रयास किया है पर इसका बहुत ज्यादा असर नहीं दिख रहा है। साढ़े 22 लाख से अधिक मतदाता वाली कानपुर सीट में सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं जिसमें एक अनुमान के अनुसार लगभग आठ लाख ब्राह्मण और 6 लाख मुसलमान है। बाकी में वैश्य, पिछड़ा, दलित व अन्य है।
अखिलेश ने अबकी बार मुस्लिम-यादव यानी माय के बजाय ब्राह्मण-मुस्लिम यानी ‘बम’ को सोशल इंजीनियरिंग में शामिल करके बाकी दलों को चुनौती दी है। मेयर चुनाव में हालांकि भाजपा, सपा और कांग्रेस में त्रिकोणीय संघर्ष कहा जाता है परंतु भाजपा और सपा के बीच सीधी लड़ाई दिखती है। सपा ने इस बार ब्राह्मण मतो पर भी भरोसा जताया है। कानपुर कान्यकुब्ज ब्राह्मणों का गढ़ बताया जाता है। भाजपा की प्रमिला पांडे सरयूपारीण ब्राह्ण हैं।
ऐसे में ब्राह्मण वोटों का विभाजन भी हो सकता है। पर ब्राह्मणों को भाजपा का वोटबैंक की धारणा अखिलेश के ‘बम’ को प्रभावित भी कर सकती है। सपा प्रत्याशी वंदना का खांटी ब्राह्मण परिवार में मायका और ससुराल दोनों ही होने का लाभ मिल सकता है। ऐसा होने पर अखिलेश यादव की ‘बम’ सोशल इंजीनियरिंग कमोबेश सफल भी हो सकती है।
समाजवादी कहते हैं कि 60 फीसदी संपत्ति पर 10 फीसदी सामान्य वर्ग का कब्जा है। लेकिन इसके बाद भी सपा ने टिकट वितरण अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सोशल इंजीनियरिंग तैयार की है। हालांकि हारजीत अन्य समीकरणों पर भी निर्भर कर सकती है। सामाजिक न्याय की समर्थक सपा ने सामान्य वर्ग को भी बढ़ावा देकर समीकरण बदलने का प्रयास किया है जिसका कितना असर है यह 13 को नतीजा के बाद पता चलेगा।
