बरेली: मनरेगा में कर रहा काम, पारिवारिक पेंशन के लिए बना दिव्यांग
अनुपम सिंह, बरेली, अमृत विचार। भोजीपुरा के अंबरपुर निवासी अभिमन्यु का पारिवारिक पेंशन के लिए किया गया आवेदन संदेह के घेरे में आ गया है। शिक्षा विभाग में कार्यरत पिता पुत्तूलाल कटियार की 20 फरवरी 2020 को हुई मौत के बाद उसने पारिवारिक पेंशन के लिए खुद को कार्य में अक्षम बताते हुए दिव्यांगता प्रमाण पत्र लगाकर आवेदन किया। शिक्षा विभाग से आवेदन की फाइल कलेक्ट्रेट स्थित कोषागार में पहुंची। शुरुआत में ही शक हुआ। इ
सके बाद अभिमन्यु मुख्य कोषाधिकारी पारस नाथ गुप्ता के सामने पेश हुआ तो फाइल में दिव्यांगता का प्रतिशत देखकर उनका शक और गहराया। मामले की जांच के लिए मुख्य कोषाधिकारी ने 5 अप्रैल 2023 को दिव्यांगता प्रमाण पत्र की जांच कराने के लिए सीएमओ और परिवार का विवरण, कुल आय, जीविकोपार्जन समेत अन्य पहलुओं की जांच के लिए सदर तहसीलदार को पत्र लिखा।
जांच रिपोर्ट का 15 दिन तक इंतजार करने के बाद 19 अप्रैल को दोबारा पत्र लिखा गया, लेकिन ताज्जुब की बात है कि दोनों स्तर से एक माह से अधिक बीत जाने के बाद भी कोई रिपोर्ट नहीं मुहैया कराई गई। ऐसे में बड़ी गड़बड़ी की आशंका है। इस दौरान आवेदनकर्ता के भाई करन सिंह ने कोषागार में आकर बतौर साक्ष्य दस्तावेज देते हुए बताया कि उसका भाई अभिमन्यु कार्य करने में सक्षम है। उसने भाई को मनरेगा में कार्यरत होना बताया। अफसरों की ओर जांच रिपोर्ट में देरी और भाई की ओर से दिव्यांग न होने का सुबूत मुहैया कराने से मुख्य कोषाधिकारी हैरान रह गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने 16 मई को डीएम शिवाकांत द्विवेदी को पत्र भेजा है। इसमें जिक्र किया कि अभिमन्यु गलत तथ्यों की जानकारी देकर अफसरों को गुमराह कर दिव्यांग पारिवारिक पेंशन चाहता है।
सीएमओ, बीएसए, तहसीलदार को भी पत्र
मुख्य कोषाधिकारी ने डीएम को पत्र लिखने के साथ ही सीएमओ, तहसीलदार सदर, बीएसए को भी पत्र जारी किया है। इसमें उन्होंने पूर्व में मांगी गई जानकारी की जांच कराकर रिपोर्ट जल्द से जल्द देने को कहा है।
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पेंशन के लिए अफसर ने की थी सिफारिश
मुख्य कोषाधिकारी के पास एक अधिकारी ने इसके लिए सिफारिश भी की थी। सिफारिश करने वाले अफसर ने कहा था कि मामले को देखकर पेंशन जारी कर दें। इस पर मुख्य कोषाधिकारी ने आवेदनकर्ता के साथ अधिकारी को भी कार्यालय में आने के लिए गुजारिश की थी, लेकिन इसके बाद न तो वह आए और न ही दोबारा फोन आया।
शिक्षा विभाग से फाइल आने पर मामला संदिग्ध लगा था। दो बार पत्र लिखने के बाद सीएमओ, तहसीलदार ने कोई रिपोर्ट नहीं दी। मामला गंभीर है। डीएम को पत्र लिखा है। साक्ष्य की जरूरत पड़ी तो दिया जाएगा।-पारस नाथ गुप्ता, मुख्य कोषाधिकारी
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