मुरादाबाद: केवल थर्मल स्क्रीनिंग के सहारे कोरोना से जंग लड़ रही खाकी

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मुरादाबाद,अमृत विचार। लाकडाउन लगने के बाद से अगर कोरोना से हमे बचाने के लिए डाक्टर के बाद कोई जूझ रहा है तो वह खाकी है। चौबीस घंटे चौराहों पर कड़ी ड्यूटी करके हमे कोरोना से बचाने वाले पुलिस कर्मी अब खुद इस खतरनाक वायरस की चपेट में आने लगे हैं। इसकी वजह है कि दूसरों …

मुरादाबाद,अमृत विचार। लाकडाउन लगने के बाद से अगर कोरोना से हमे बचाने के लिए डाक्टर के बाद कोई जूझ रहा है तो वह खाकी है। चौबीस घंटे चौराहों पर कड़ी ड्यूटी करके हमे कोरोना से बचाने वाले पुलिस कर्मी अब खुद इस खतरनाक वायरस की चपेट में आने लगे हैं। इसकी वजह है कि दूसरों को मास्क व सेनेटाइजर का प्रयोग करने वाले अफसर अपने अधीनस्थों की सुध नहीं ले रहे हैं। मौजूदा समय में किसी भी थाने या फिर पुलिस कार्यालय में सेनेटाइजेशन मशीन नहीं हैं।

एसएसपी कार्यालय से लेकर पुलिस लाइन का भी यही हाल है। हालांकि यहां पर केवल थर्मल स्क्रेनिंग के जरिए पुलिस कर्मियों को कोरोना से बचाने की कवायद चल रही है। कहने को लाकडाउन के दौरान एक दफा पुलिस कर्मियों को सेनेटाइजर, मास्क व गमछा वितरित किए गए थे लेकिन दोबारा इनके वितरण की किसी ने सुध नहीं ली। यही वजह है कि पुलिस कर्मी खुद अपने पास से सेनेटाइजर व मास्क की व्यवस्था कर रहे हैं।

कोरोना का कहर बढ़ा तो जनता कर्फ्यू के बाद से पूरे देश में लाकडाउन लगा दिया गया। करीब 72 दिन तक लगातार चले लाकडाउन में सबसे सख्त ड्यूटी पुलिस कर्मियों की हो गई। लाकडाउन का कड़ाई से पालन कराने के लिए पुलिस कर्मी हर वक्त चौराहों व सड़कों पर नजर आने लगे। मई के पहले सप्ताह लाकडाउन में छूट मिली तो पुलिस कर्मियों ने कुछ राहत ली। हालांकि छूट में लोगों की लापरवाही एक बार फिर भारी पड़ रही है। रोजाना कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इन आंकड़ों में हमारी ढाल कहने जाने वाले पुलिस कर्मी भी शामिल हो रहे हैं।

तमाम पॉजिटिव तो सैकड़ों हो चुके क्वारंटाइन
पुलिस कर्मियों के कोरोना संक्रमण का पहला मामला नागफनी थाने में आया था। जब नवाबपुरा बवाल के बाद नागफनी एसओ कोरोना की चपेट में आ गए थे। इसके बाद कुछ पुलिस कर्मी आए तो पूरे थाने को क्वारंटाइन कर दिया गया। फिर कोर्ट मोहर्रिर व एसएसपी कार्यालय में तैनात पुलिस कर्मी कोरोना संक्रमित निकले। इसके बाद से तो लगातार पुलिस कर्मी कोरोना संक्रमित आ रहे हैं। सैकड़ों पुलिस कर्मियों को अभी तक क्वारंटाइन कर दिया गया था। यह सिलसिला बदस्तूर जारी है।

केवल मास्क व सेनेटाइजर बांटकर लड़ ली जंग
कोरोना संक्रमण की चपेट में पुलिस कर्मियों के आने की मुख्य वजह है कि अफसरों द्वारा उनकी अनदेखी करना। बुधवार को जब खाकी से जुड़े कार्यालयों का निरीक्षण किया गया तो यही हकीकत सामने आई। एसपी सिटी और एसपी ट्रैफिक के कार्यालय में सेनेटाइजेशन मशीन नहीं थी। पूछने पर पुलिस कर्मियों ने बताया कि आज तक लगी ही नहीं हैं। वह लोग अपने पास से मास्क व सेनेटाइजर खरीद रहे हैं।

एसएसपी कार्यालय का भी यही हाल था। केवल थर्मल स्क्रीनिंग करके सभी को प्रवेश दिया जा रहा था। सीओ सिविल लाइंस कार्यालय पर भी मशीन नजर नहीं आई। हालांकि पूछने पर बताया गया कि समय-समय पर कार्यालय को सेनेटाइज किया जाता है। पुलिस लाइन में भी मशीन नहीं थी। थर्मल स्क्रीनिंग की सुविधा थी लेकिन अधिकतर लोग बिना जांच कराए अंदर जा रहे थे।

अंदर गाड़ियों को सेनेटाइज किया जा रहा था। पूछने पर पुलिस कर्मियों ने बताया कि मशीन नहीं हैं लेकिन सेनेटाइजर व पानी की बाल्टी रखी है। नाम न छापने की शर्त पर पुलिस कर्मियों ने बताया कि जब कोरोना अपने चरम पर था तो एक दफा थानों व कार्यालयों में तैनात पुलिस कर्मियों को मास्क, गमछा व सेनेटाइजर मुहैया कराए गए थे लेकिन वह भी सभी को नहीं मिल पाए थे। कमोबेश किसी भी थाने में सेनेटाइजेशन मशीन नहीं हैं।

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