बरेली: बोन मैरो ट्रांसप्लांट ने दिलाई थैलेसीमिया से निजात

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तीन सालों में सौ मरीजों ने सरकारी मदद से कराया ट्रांसप्लांट, कई और लाइन में

अंकित चौहान, बरेली, अमृत विचार। मासूमों को भयंकर पीड़ा देने वाली आनुवांशिक बीमारी थैलेसीमिया से निजात पाने का रास्ता मिल गया है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराने की सुविधा भले ही देश के चुनिंदा अस्पतालों में ही उपलब्ध है लेकिन थैलेसीमिया के मरीजों को धीरे-धीरे कम कर रही है। वर्ष 2020 में थैलेसीमिया के जिले में 256 मरीज थे जो अब घटकर 156 रह गए हैं। सौ मरीजों ने सरकारी की मदद से अस्थि मज्जा यानी बोन मैरो ट्रांसप्लांट करा लिया है।

कई और मरीज बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराने की प्रक्रिया में हैं। ट्रांसप्लांट के लिए शासन की ओर से 50 फीसदी से ज्यादा अनुदान देने का प्रावधान है। थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है जिसमें शरीर असामान्य या अपर्याप्त हीमोग्लोबिन बनाता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कणिकाओं में पाया जाने वाला प्रोटीन वर्णक है जो ऑक्सीजन का वहन करता है। इससे बड़ी संख्या में लाल रक्त कणिकाएं नष्ट हो जाती हैं।

बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा फिलहाल पीजीआई चंडीगढ़, एम्स नई दिल्ली, राजीव गांधी कैंसर इंस्टिट्यूट एंड रिसर्च सेंटर नई दिल्ली, सीएमसी वेल्लौर, टाटा मेडिकल सेंटर कोलकाता, संजय गांधी पीजी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस लखनऊ, नारायन हृदयालया लुधियाना और सीएमसी लुधियाना में उपलब्ध है।

जिले में थैलेसीमिया से ग्रसित मरीजों की संख्या घट रही है। करीब सौ मरीजों ने सरकार की मदद से बोन मैरो ट्रांसप्लांट करा लिया है। इसकी सूचना भी इन मरीजों ने विभाग को दी है। - डॉ. अलका शर्मा, एडीएसआईसी जिला अस्पताल


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