लखीमपुर-खीरी: काम नहीं आई एसपी की फौज बदमाशों की फुल मौज
एसपी के सारे दावे धड़ाम, सुस्त पड़ी टीमों की जांच, मुख्य आरक्षी को गोली मारकर घायल करने का मामला
लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। थाना मैगलगंज क्षेत्र में लिधियाई मोड़ पर मुख्य आरक्षी को गोली मारकर घायल करने के मामले में एसपी ने सात टीमें लगाईं थीं, लेकिन एसपी की यह फौज किसी काम नहीं आई। घटना को एक माह पूरा हो गया है, लेकिन पुलिस अभी तक बदमाशों की पहचान तक नहीं कर सकी है।
इससे एसपी ने जो पूर्व में दावे किए थे, वह भी हवा हवाई साबित होते दिख रहे हैं। पुलिस की जांच भी अब सुस्त पड़ गई है। जिले में खाकी पर हमले की पहले भी घटनाएं हो चुकी हैं। पुलिस ने हफ्ते भर में हमला करने वाले की पहचान कर उसे मार गिराया या फिर गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
जनवरी से अब तक पुलिस पर हमले की चार घटनाएं हुई हैं। 24 अप्रैल 23 की रात थाना मैगलगंज क्षेत्र में लिधियाई मोड़ पर बदमाशों ने कोबरा मोबाइल के मुख्य आरक्षी अनिल सिंह चौहान के सीने पर गोली मार दी थी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अब वह घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।
सिपाही को गोली मारे जाने की घटना से छह दिन पहले एलआरपी पुलिस चौकी इंचार्ज चेतन चौहान शहर के एलआरपी चौराहे पर डग्गामार वाहनों की चेकिंग कर रहे चौकी इंचार्ज और उनकी टीम पर चालक ने बस चढ़ाने की कोशिश की थी।
20 जनवरी को मूडा सवारन चौकी के गांव छैरासी में फसल विवाद को लेकर समझौता कराने गए चौकी प्रभारी अरुण कुमार से दबंगों ने सर्विस रिवाल्वर तथा मोबाइल छीन लिया और कार में सवार होकर लखनऊ की तरफ भाग निकले थे। सर्विस रिवाल्वर कई दिन बाद लखनऊ के पास से बरामद हुआ।
पुलिस ने इन सभी मामलों के आरोपियों को गिरफ्तार किया और जेल भेजा, लेकिन कोबारा मोबाइल के मुख्य आरक्षी को गोली मारकर घायल करने के मामले में पुलिस एक कदम आगे नहीं बढ़ा सकी है। एसपी गणेश प्रसाद साहा ने घटना के खुलासे में सीओ समेत सात टीमें लगाई थीं, लेकिन एसपी की यह फौज बदमाशों का सुराग लगाने में नाकाम रही। इतना ही नहीं समय बीतने के साथ ही खुलासे में लगी टीमों की जांच भी अब सुस्त पड़ गई है। एसपी गणेश प्रसाद साहा का कहना है कि टीमें लगी हुई हैं और वह अपना काम कर रही हैं। जल्द ही मामले का राजफाश होगा।
मुख्य आरक्षी को गोली मारे जाने के मामले पर एक नजर
कोतवाली मैगलगंज के लिधियाई मोड़ पर 24 अप्रैल की आधी रात के बाद पुलिस और बदमाशों की मुठभेड़ हो गई थी। कोबारा मोबाइल के साहसी हेड कांस्टेबल अनिल सिंह चौहान ने एक बदमाश को दबोच लिया था। करीब दस मिनट तक हेड कांस्टेबल और बदमाश के बीच बीच खूब गुत्थमगुत्था हुई थी। इसी बीच एक बदमाश ने हेड कांस्टेबल को तमंचे से गोली मार दी थी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था।
साथी सिपाही राहुल की सूचना पर थाना मैगलगंज पुलिस समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची थी। पुलिस ने घायल हेड कांस्टेबल को लखनऊ के केजीएमयू में भर्ती कराया था। साथ ही एसपी गणेश प्रसाद साहा के नेतृत्व में घेराबंदी कर बदमाशों की तलाश में सर्च अभियान चलाया था, लेकिन बदमाश पुलिस के हाथ नहीं लग सके थे।
एसपी गणेश प्रसाद साहा ने बदमाशों की तलाश में सात टीमें लगाई थी। इसके साथ ही क्राइम ब्रांच और सर्विलांस टीम की भी मदद ली जा रही है, लेकिन पूरा एक महीना बीत चुका है। अभी तक बदमाशों की पहचान भी नहीं हो सकी है।
जांच के दौरान एसपी का यह था दावा
घटना के बाद से पुलिस की टीमें पड़ोसी जनपदों हरदोई, सीतापुर और शाहजहांपुर में खाक छानती रही हैं। हालांकि एसपी गणेश प्रसाद साहा ने घटना के एक पखवाड़े के बाद दावा किया था कि टीमों ने कुछ बदमाशों के ग्रुपों को चिन्हित किया है। पुलिस को पूरा भरोसा है कि हेड कांस्टेबल पर गोली चलाने वाले बदमाश इन्हीं में से किसी ग्रुप के हैं।
पुलिस की टीमें ग्रुपों में शामिल कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की थी, लेकिन अभी तक कोई ऐसे सुराग और तथ्य पुलिस के हाथ नहीं आए हैं, जिन्हें पुलिस गोली चलाने वाले बदमाशों तक पहुंच सके।
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