UPSC Success Story : साफ लक्ष्य, मजबूत इरादा हो तो जरूर मिलेगी सफलता

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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में सफलता पाने वाले संभल के शिवांग रस्तोगी से खास बातचीत

शिवांग को मिठाई खिलाते पिता व मौजूद अन्य परिजन

भीष्म सिंह देवल,अमृत विचार। संघ लोक सेवा आयोगा (यूपीएससी) की परीक्षा में कामयाबी से सफलता की इबारत लिखकर घर परिवार व जनपद का गौरव बढ़ाने वाले शिवांग रस्तोगी का कहना है कि लक्ष्य साफ होना चाहिए कि आपको जीवन में करना क्या है। साफ लक्ष्य और पक्के इरादे के साथ जुटा जाए तो यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस बनने का सपना जरूर साकार होगा।

अमृत विचार से खास बातचीत में शिवांग ने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें चौथे प्रयास में कामयाबी मिली है। 2019 में पहली बार परीक्षा दी तो प्री एग्जाम भी पास नहीं हुआ। 2020 और 2021 में प्री क्वालीफाई किया मगर मेन एक्जाम में पास नहीं हो पाये। इरादा मजबूत था, बिना निराश हुए जुटे रहे। अब परिणाम सबके सामने है। सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं को संदेश देते हुए शिवांग बोले कि तय कर लीजिए कि आपको जीवन में करना क्या है। अगर आपका लक्ष्य साफ है कि मुझे सिविल सर्विस में जाकर देश की सेवा करनी है, तभी आप इसकी तैयारी में उतरिये। यह कठिन है, यह सबको पता है। कठिनता परीक्षा की नहीं बल्कि इसकी परिस्थितियों की है। आपको जुझारू बनकर परिस्थितियों से जूझना है और अंतत: सफलता आपकी होगी यह तय है। जरूरी नहीं है कि आपको शुरू के एक दो साल में ही सफलता मिल जाये। कुछ लोगों को छह साल भी लग जाते हैं। अगर आपका लक्ष्य साफ है तो जो जब आपका खराब समय आयेगा तो आपका पक्का इरादा उसे पार कराकर लक्ष्य तक पहुंचाने का काम करेगा।

नारी सशक्तिकरण व एजूकेशन सिस्टम में सुधार को करेंगे काम
307 रैंक के साथ आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले शिवांग का कहना है कि जो सर्विस एलोकेट होगी, उसमें मेरा प्रयास होगा कि बेहतर कर पाऊं। मैं यह सोचता हूं कि किसी भी देश की नींव रखी जाती है उसकी शिक्षा से। अगर देश में एजुकेशन सिस्टम अच्छा कर पाऊं तो मैं उस क्षेत्र में काम करना चाहता हूं। नारी सशक्तिकरण पर हम लोगों को फोकस करना चाहिए। महिला सशक्त होगी तो 50 प्रतिशत महिला और 50 प्रतिशत पुरुष आबादी मिलकर इस देश को बहुत मजबूत देश बनाने का काम करेंगे।  

माता पिता ने दिया आशीर्वाद, दोस्तों ने बढ़ाया हौसला
शिवांग कहते हैं कि मैं अपनी कामयाबी के लिए भगवान को सबसे बड़ा श्रेय देता हूं। दूसरे नंबर पर भगवान के बराबर ही मैं अपने माता-पिता को रखकर उन्हें इस कामयाबी का श्रेय देता हूं। जिनकी शिक्षा और संस्कार ने मुझे इस लायक बनाया। मेरा सपोर्ट सिस्टम बहुत अच्छा है। चाहें मेरे रिलेटिव हों या फिर चुनिंदा अच्छे दोस्त हों। दोस्तों ने मेरा बहुत सहयोग किया। जब मुझे सफलता नहीं मिल पा रही थी, तब दोस्तों ने हमेशा मुझे समझाया और हौसला बढ़ाकर गिरने से बचाया।

सोशल मीडिया से बनाकर रखी दूरी
आज के युवा जहां दिनभर सोशल मीडिया में खोए रहते हैं, वहीं शिवांग ने सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखी। वह रोजाना आठ से दस घंटा पढ़ाई करते थे। एलकेजी से 12वीं तक संभल के बाल विद्या मंदिर स्कूल से शिक्षा ली और फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री वेंकटेश्वर कालेज से बी कॉम किया। इसके बाद ओपन यूनिवर्सिटी से एम कॉम के साथ ही यूपीएससी की तैयारी भी की।

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