बरेली: डीएम साहब ! नौ साल से अटकी है हमारी फाइल
अग्निशमन विभाग को नजूल भूमि के हस्तांतरण के मामले में डीआईजी फायर ब्रिगेड ने फिर लिखा पत्र
बरेली, अमृत विचार। नजूल भूमि पर बने करीब 55 साल पुराने अग्निशमन विभाग के आवासीय और अनावासीय भवनों की हालत बेहद जर्जर हो जाने के बावजूद प्रशासन के स्तर पर ऐसा पेच फंसा हुआ है कि विभागीय अधिकारियों को समस्या से पार पाने का कोई रास्ता ढूंढे नहीं मिल रहा है। नजूल भूमि को अग्निशमन विभाग को हस्तांतरित करने की फाइल नौ सालों से प्रशासन के पास अटकी हुई है। अब डीआईजी अग्निशमन व आपात सेवा ने एक बार फिर डीएम को पत्र लिखा है।
शहर की तत्कालीन नगर पालिका ने 1968 में बरेली कॉलेज के पास नजूल भूमि पर अग्निशमन कार्यालयों की स्थापना कराई थी लेकिन यह भूमि अग्निशमन विभाग को हस्तांतरित नहीं हो पाई। अब कार्यालयी भवनों के साथ आवास भी इस कदर जर्जर हो गए हैं कि हर वक्त हादसे की आशंका बनी रहती है। कार्यालय और आवासों दोनों जगह अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच दहशत का माहौल बना रहता है।
अग्निशमन विभाग इन जर्जर भवनों को तोड़कर नए सिरे से कार्यालय और आवासीय भवनों का निर्माण कराना चाहता है लेकिन चूंकि जमीन उसके नाम नहीं है लिहाजा यह काम नहीं हो पा रहा है। वर्ष 2014 से अग्निशमन विभाग इस संबंध में जिला प्रशासन के साथ लिखापढ़ी कर रहा है लेकिन इसके बावजूद फाइल ऐसी अटकी है कि आगे बढ़ने में नहीं आ रही है।
अब एक बार फिर डीआईजी अग्निशमन व आपात सेवा जुगल किशोर ने डीएम को नजूल भूमि हस्तांतरित करने के लिए पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि अग्निशमन केंद्र नगर निगम प्रदत्त भवनों में चल रहा है जो अत्यधिक जीर्ण-क्षीर्ण हो चुके हैं। इससे यहां रहने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के परिजनों और यहां आने वाले जनसामान्य के जीवन को भी खतरा है। पुराने भवनों को ध्वस्त कराकर नए भवन बनाना बेहद जरूरी है। डीआईजी ने कहा है कि 2238.78 वर्ग मीटर नजूल भूमि अभिलेखीय रूप से पुलिस विभाग (फायर सर्विस) के नाम नहीं है। इसलिए भवनों को निष्प्रोज्य घोषित कर नए भवन का निर्माण संभव नहीं हो पा रहा है। डीएम ने ने डीआईजी का पत्र एडीएम एफआर को भेजा है। एडीएम ही नजूल भूमि के मामले में नोडल अधिकारी हैं।
नए भवन ते सिए 2014 में जारी हो चुके हैं चार करोड़
अग्निशमन विभाग की जर्जर इमारत तोड़कर उसकी जगह नई इमारत बनाने के लिए अफसरों ने कई साल पहले ही शासन से लिखापढ़ी शुरू कर दी थी। इसके बाद 2014 में अग्निशमन केंद्र के जर्जर आवासीय और अनावासीय भवनों के स्थान पर नए भवनों के निर्माण के लिए उप्र आवास एवं विकास परिषद को कार्यदायी संस्था नामित कर शासन ने चार करोड़ रुपये की धनराशि भी अवमुक्त कर दी लेकिन प्रशासन के स्तर पर फंसा पेच नहीं निकल पाया।
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