बरेली: बॉम्बे हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित, मंडलायुक्त ने अलकेमिस्ट से देनदारियों पर की चर्चा

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Edited By Amrit Vichar
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अलकेमिस्ट एसेट रि-कंस्ट्रक्शन कंपनी बैठक कर केस में समाधान निकालने को आगे आई

बरेली, अमृत विचार। होली से बॉम्बे हाईकोर्ट में रबर फैक्ट्री की भूमि पर मालिकाना हक के मामले में फैसला सुरक्षित रखा है। 18 अरब रुपये से अधिक कीमत की भूमि के मामले में फैसला सुनाए जाने को लेकर अभी हाईकोर्ट का रुख भी स्पष्ट नहीं दिख रहा है, लेकिन हाईकोर्ट के निर्णय से पहले अलकेमिस्ट एसेट रि-कंस्ट्रक्शन कंपनी ने जिला प्रशासन के साथ बैठकें कर रबर फैक्ट्री केस में समाधान निकालने की पहल की है। सोमवार को मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कमिश्नरी में हुई बैठक में रबर फैक्ट्री की देनदारियों पर चर्चा की।

8 मई को डिफेंस कालोनी नई दिल्ली स्थित कंपनी के प्रतिनिधियों ने मंडलायुक्त को तीन पेज की चिट्ठी भेजी। उसी चिट्ठी का संज्ञान लेते हुए मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने सोमवार को कमिश्नरी में बैठक बुलाई। दोपहर करीब 12.10 बजे बैठक कमिश्नरी सभागार में शुरू हुई, जिसमें नई दिल्ली से अलकेमिस्ट के सचिन गुप्ता समेत तीन पदाधिकारियों के साथ जिलाधिकारी शिवाकान्त द्विवेदी, यूपीसीडा के रीजनल मैनेजर संतोष सिंह, नगर मजिस्ट्रेट रेनू सिंह, जिला उद्योग केंद्र के अधिकारी भी बैठे।

इसके साथ लखनऊ से विशेष सचिव औद्योगिक निधि श्रीवास्तव और कानपुर से यूपीसीडा के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ऑनलाइन जुड़े। करीब आधे घंटे तक मंडलायुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में रबर फैक्ट्री से जुड़ी देनदारियों पर चर्चा हुई।

संपूर्ण रिपोर्ट नहीं होने की कही बात
मंडलायुक्त ने अलकेमिस्ट के प्रतिनिधियों से देनदारियों के संबंध में जानकारी ली लेकिन प्रतिनिधियों ने देनदारियों के संबंध में संपूर्ण रिपोर्ट नहीं होने की बात कही। बैठक में मंडलायुक्त ने फैक्ट्री बंद होने के परिणाम स्वरूप भूमि पर चर्चा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

साथ ही अलकेमिस्ट के प्रतिनिधि सचिन गुप्ता को निर्देश दिए कि रबर फैक्ट्री द्वारा बैंकों से लिए गए लोन, श्रमिकों की देनदारी आदि के समस्त कागजात अगली बैठक से पहले उपलब्ध कराएं। इस दौरान प्रतिनिधि सचिन गुप्ता ने 4 जुलाई को प्रस्तावित अगली बैठक में देनदारियों के संबंध में संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

कदम को सकारात्मक देखा गया
वहीं यूपीसीडा के रीजनल मैनेजर संतोष कुमार ने बताया कि देनदारियों को लेकर ही चर्चा हुई थी। अलकेमिस्ट ने अगली बैठक में देनदारियों की जानकारी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। अगली बैठक में देनदारियां मालूम होने पर ही बैठक की दिशा आगे बढ़ेगी लेकिन अलकेमिस्ट के बैठक कर समाधान निकालने के कदम को सकारात्मक देखा गया है।

राज्य सरकार की मांग मानी, पुरानी बेंच ही में 6 जून को सुनवाई
22 फरवरी को हुई सुनवाई में रबर फैक्ट्री केस में बॉम्बे हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसी बीच केस की बेंच बदल गई। 8 मार्च को तारीख पड़ी थी, जो होली पर थी इसलिए इसमें सुनवाई नहीं हुई।

इसके बाद राज्य सरकार की ओर से बेंच के अचानक बदलने के मामले में मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट में प्रत्यावेदन दिया गया। पुरानी बेंच में ही मामले की सुनवाई करने की मांग रखी गई। वह मांग अब हाईकोर्ट ने मान ली है। केस की 6 जून को होने वाली सुनवाई पुरानी बेंच में ही होगी।

यूपीसीडा के रीजनल मैनेजर संतोष कुमार ने बताया कि पुरानी बेंच में सुनवाई होगी, सुनवाई में क्या रहेगा, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। पुरानी बेंच में ही सुनवाई होना सरकार के लिए अच्छी बात है। 22 फरवरी को बॉम्बे हाईकोर्ट में सिंगल बेंच ने अलकेमिस्ट एसेट्स रिकंस्ट्रक्शन लिमिटेड के पक्ष को सुना था।

जबकि राज्य सरकार का पक्ष 2 फरवरी को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने साक्ष्यों के साथ कोर्ट को बताया था। 22 फरवरी को अलकेमिस्ट के वकील से कई बिंदुओं पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने बहस भी की थी। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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