बरेली: भूमिगत लाइन में फाल्ट हुआ तो ढूंढ नहीं पाएगा विभाग
बिजली की अधिकतर लाइनें भूमिगत, विभाग के पास नहीं फाल्ट लोकेटर मशीन
बरेली, अमृत विचार। स्मार्ट सिटी के तहत शहर के अधिकतर इलाकों में बिजली के तारों का मकड़जाल हटा दिया गया है। सिविल लाइंस के अधिकतर इलाकों में भूमिगत केबिल बिछा दी गई है लेकिन भूमिगत बिजली की लाइन में फाल्ट हो जाए तो विभाग के पास फाल्ट लोकेटर मशीन ही नहीं है। अगर कोई फाल्ट हुआ तो उसके लिए स्मार्ट सिटी के तहत डाली गई सड़कों को एक बार फिर से खोदना पड़ सकता है।
शहर में बेहतर बिजली सप्लाई के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद बिजली तंत्र बार-बार फेल हो जाता है। तारों के आपस में टकराने के बाद आए दिन फाल्ट होने से बिजली गुल नहीं हो इसके लिए भूमिगत केबिल को डाला गया है। लेकिन विभाग के पास अपनी फाल्ट लोकेटर मशीन ही नहीं है। ऐसे में अगर अब बिजली की भूमिगत लाइन में फाल्ट होता है तो उसे तलाशने के लिए विभाग को किराये की फाल्ट लोकेटर मशीन को बुलाना पड़ता है।
धमाके के बाद से मशीन का नहीं हो सका इस्तेमाल
दो माह पहले स्मार्ट सिटी के तहत एक फाल्ट लोकेटर मशीन को खरीदा गया था। जिसका उद्घाटन रामपुर बाग बिजलीघर में कराया गया था, लेकिन मशीन के उद्घाटन के दौरान मशीन में तेज धमाका होने से वन मंत्री डा. अरुण कुमार बाल-बाल बच गए थे। हादसे में एक संविदा कर्मचारी भी घायल हो गया था। जिसकी जांच भी कराई गई थी, लेकिन अभी मशीन बिजली विभाग को हैंड ओवर नहीं की गई है।
कई बार हो चुके है हैं भूमिगत केबिल में फाल्ट
पिछले दिनों कैंट इलाके में भूमिगत केबिल में फाल्ट हो गया था। उसके बाद अधिकारियों ने दूसरी मशीन को बुलाकर फाल्ट देखकर उसे ठीक किया था। इससे पहले भी कई बार खोदाई के दौरान भूमिगत केबिल में फाल्ट हो जाने से उपभोक्ता परेशान हुए हैं।
भूमिगत केबिल में एक मेन और दूसरी स्पेयर लाइन होती है। फाल्ट हो जाने के बाद टेंडर वाली कंपनी से संपर्क कर फाल्ट लोकेटर मशीन को बुलाया जाता है। विभाग के एक पास मशीन थी जो खराब पड़ी है। स्मार्ट सिटी वाली मशीन अभी तक हैंडओवर नहीं की गई है। आरके पांडे, अधिशासी अभियंता बिजली विभाग
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