Kannauj: सांसद समेत भाजपाइयों की पिटाई से खाकी आहत, चर्चाओं का बाजार गर्म, पिटाई से घायल पुलिसकर्मियों के चोटें एक जैसी
कन्नौज में सांसद समेत भाजपाइयों की पिटाई से खाकी आहत।
कन्नौज में सांसद समेत भाजपाइयों की पिटाई से खाकी आहत। पिटाई की रिपोर्ट दर्ज न होने पर कोतवाली पुलिस ने शस्त्र डाल दिए थे।
कन्नौज, अमृत विचार। अपहरण के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सांसद समेत भाजपाइयों द्वारा पिटाई से खाकी खासी आहत हुई। आरोपियों के खिलाफ जब रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई तब घायल पुलिस ने शस्त्र जमा कर दिए और हौसले डिग से गए। यहां तक कि इतनी बेइज्जती के बाद नौकरी से इस्तीफा देने की बात तक कर डाला। तब जाकर उच्च अधिकारियों के निर्देश पर प्रकरण में रिपोर्ट दर्ज की गई जिसमें सांसद को भी नामजद किया गया।
शुक्रवार की रात उन्नाव से हुए युवक के अपहरण के मामले में वहां की पुलिस कन्नौज पहुंची थी। स्थानीय पुलिस के सहयोग से युवक को छुड़ाने के साथ चार आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया और चली गई। इसके बाद ही भाजपाइयों ने आरोपियों को छुड़ाने को लेकर सांसद से बात कराने की बात मंडी समिति चौकी इंचार्ज से की। इसके बाद हुई गरमागरमी के बाद गालीगलौज और फिर बात मारपीट तक पहुंच गई।
आरोप है कि कार्यकर्ताओं की सूचना पर पहुंची सांसद सुब्रत पाठक और पुलिस कर्मियों के बीच मारपीट हुई। साथ ही अभद्र भाषा का प्रयोग भी किया गया। घटना में पुलिस के सात जवान घायल हुए और कई थानों की पुलिस बुलानी पड़ी। देर रात तक बवाल चलता रहा। घायल हुए पुलिस कर्मी औरों के साथ सांसद को नामजद कराना चाह रहे थे लेकिन इसमें अड़चन आ रही थी। इससे आहत हुए पुलिस बल ने अपने शस्त्र थाने में जमा करते हुए नौकरी छोड़ देने तक की बात कर डाली।
इसकी जानकारी कोतवाली प्रभारी ने एसपी को दी। काफी देर के मंथन के बाद एसपी के निर्देश पर कोतवाली प्रभारी अजय कुमार अवस्थी ने सांसद समेत 52 भाजपाइयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस ने फर्द तैयार कराई और रिपोर्ट दर्ज की गई।
भले ही रिपोर्ट दर्ज हो गई लेकिन फजीहत से आहत कोतवाली पुलिस बाद में भी पुलिस सहमी दिखी। पुलिस यह मान कर चल रही है कि सांसद की गिरफ्तारी भले न हो पर रिपोर्ट दर्ज होने से पहली जीत हासिल कर ली है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद शनिवार को सदर कोतवाली में पीएसी के साथ एसओजी टीम पूरे दिन डेरा डाले रही।
पुलिस पिटाई के बाद चर्चाओं का बाजार रहा गर्म
अपहरण के आरोपियों को पुलिस से मुक्त कराने को लेकर पुलिस से हुई हाथापाई में सात पुलिस जवान घायल हो गए। मामले में पुलिस ने सांसद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। इसको लेकर शनिवार के बाद रविवार को भी लोग जानकारी करते रहे।
जनप्रतिनिधि द्वारा खाकी से मारपीट को लेकर कहीं लोग आलोचना करते दिखाई दिए तो कहीं सवाल उठा रहे थे कि रिपोर्ट तो लिख ली तो क्या गिरफ्तारी भी होगी ? इसके बाद यह भी जोड़ा जा रहा था कि कोरोना के दौर में तहसीलदार के साथ भी सांसद का कुछ ऐसा ही मामला सामने आया था। तब भी रिपोर्ट लिखी गई थी लेकिन गिरफ्तारी नहीं की गई थी। कुछ दिन के बाद इस मामले में सांसद की तहसीलदार से सुलह हो गई थी।
सांसद पर किसी तरह की आंच नहीं आई थी। लोगों का मानना है कि इस प्रकरण में संभव है सुलह हो जाए। कुछ लोग चर्चा कर रहे हैं कि भले ही पुलिस ने सांसद समेत 52 भाजपाइयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है पर जांच के नाम पर पुलिस ही खाना-पूरी कर मामले को रफादफा कर देगी। अभी हाल ही का मामला है इसी लिए तूल दिया जा रहा है। कुछ दिन बाद पुलिस के साथ मारपीट को सब भूल जायेंगे।
पिटाई से घायल पुलिसकर्मियों के चोटें एक जैसी
दो जून को मंडी समिति में भाजपाइयों की पिटाई से तीन दरोगा व चार सिपाही घायल हुए थे। खास यह कि सभी के शरीर पर जो चोटों के निशान हैं वे एक जैसे हैं। खास बात यह रही कि मारपीट के दौरान सांसद व अन्य भाजपाइयों द्वारा जिस हथियार (अज्ञात) का प्रयोग किया उसी से पुलिस को चोट आई। सभी के चोटें एक जैसी निकली।
दरोगा हो या सिपाही सभी के जो चोट लगी वह बराबर गहराई में मिली। यही नहीं चौड़ाई भी समान थी। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि आरोपी ने जिस शस्त्र से प्रहार किया उसी से सभी पुलिस जवानों को पीटा गया। पीटने वाला एक ही व्यक्ति रहा होगा। यदि सांसद समेत 52 भाजपाई पुलिस पर हमला करते तो सात पुलिस जवानों का क्या हाल होता यह तो सभी समझ सकते हैं।
चोट के निशान हकीकत खुद बयां कर रहे हैं। किसी भी पुलिस जवान के चेहरे में चोट नहीं आई। सभी के हाथ, सीना, पीठ में चोट लगी है जब कि सबसे पहले चेहरे व सिर में पर चोट लगती है। मारपीट करने वाले आरोपी 52 लोग थे। इसके बाद भी मारपीट में चोट के निशान एक जैसे निकले हैं।
