संत कबीर नगर : गुटबाजी और टिकट वितरण में गड़बड़ी के चलते खलीलाबाद और मेंहदावल क्षेत्र में निकाय की सभी सीटें हार गई भाजपा

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, संत कबीर नगर । दुनिया की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी भाजपा को उसके बेहद समर्पित मठाधीश ही कमजोर करने में जुटे हैं। जिले में जितने नेता उतनी गोल बन चुकी है। बड़े नेताओं के आगमन पर सभी मठाधीश अपनी कालर टाइट करके मंच की शोभा बढ़ाने लगते हैं और उनके जाते ही अपनी डफ़ली अपना राग अलापने लगते हैं। सबसे गम्भीर बात तो यह है कि इस जिले के मठाधीश खुद की पार्टी के प्रत्याशियों को चुनाव में पराजित कराने में पूरी क्षमता लगा देते हैं। इस गुटबाजी को रोकने के लिए प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व भी कोई ठोस इंतजाम नहीं कर पा रहा है।

बताते चलें कि जनपद संतकबीरनगर भारतीय जनता पार्टी के लिए हमेशा से बेहद अनुकूल रहा है। यहां से अष्टभुजा प्रसाद शुक्ल, इंद्रजीत मिश्र, शरद त्रिपाठी और इं. प्रवीण निषाद ने देश की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंच कर अपनी सफलता का झंडा बुलंद किया है। इनके अलावा मेंहदावल से स्व. चंद्रशेखर सिंह प्रदेश की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हैं तो वहीं राकेश सिंह बघेल और अब अनिल त्रिपाठी मेंहदावल क्षेत्र से विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। खलीलाबाद की बात करें तो यहां से रामचरित्र कन्नौजिया, द्वारिका प्रसाद, दिग्विजय नारायण उर्फ जय चौबे और वर्तमान विधायक अंकुर राज तिवारी ने यहां से भाजपा का झंडा बुलंद किया है।

धनघटा विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां से सन्तू राम, श्रीराम चौहान और वर्तमान विधायक गणेश चौहान भी सूबे की विधानसभा में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। लेकिन बीते पंचायत चुनावों में भाजपा गुटबाजी की शिकार हो गई। तत्कालीन जिलाध्यक्ष बद्री प्रसाद यादव के नेतृत्व में लड़े गए पंचायत चुनाव में भाजपा ने आधा दर्जन जिला पंचायत सीटों पर भी जीत हासिल नहीं कर पाई। आलम यह रहा कि सत्ता शासन के बावजूद समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी बलिराम यादव ने एकतरफ मुकाबले में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जा जमा लिया। उनके निर्वाचन में तत्कालीन भाजपा विधायक दिग्विजय नारायण उर्फ जय चौबे की बड़ी भूमिका रही और उस चुनाव के तत्काल बाद जय चौबे ने भारतीय जनता पार्टी को अलविदा कह कर सपा का दामन थाम लिया।

बात करें निकाय चुनावों की तो इस चुनाव में भी हैंसर बाजार-धनघटा और हरिहरपुर नगर पंचायत के अलावा भाजपा कहीं मुख्य लड़ाई में ही नहीं रही। जिले की लोकसभा और सभी तीनों विधानसभा सीटों पर भाजपा और सहयोगी दल का वर्चस्व होने के बावजूद निकाय चुनावों में इतनी बुरी पराजय के लिए लोग भाजपाई मठाधीशों को ही जिम्मेदार मान रहे हैं।

नगरपालिका खलीलाबाद, नगर पंचायत मगहर और नगरपंचायत बखिरा खलीलाबाद विधानसभा क्षेत्र में आती है। यहां भाजपा ने खलीलाबाद से निवर्तमान चेयरमैन श्यामसुंदर वर्मा, मगहर से निवर्तमान चेयरमैन संगीता वर्मा और नव गठित नगर पंचायत बखिरा से डा. हरिओम बख्शी को मैदान में उतारा था। नगरपालिका खलीलाबाद से लगभग डेढ़ दर्जन लोगों ने भाजपा से टिकट की दावेदारी पेश किया था। टिकट श्यामसुंदर वर्मा को मिला तो शेष सभी दावेदारों ने चुनाव में जबरदस्त भितरघात करके भाजपा प्रत्याशी श्यामसुंदर वर्मा को बुरी तरह पराजित कराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। अलबत्ता सदर विधायक अंकुर राज तिवारी ने सभी को एकजुट करने में अपनी पूरी क्षमता लगा दिया था। चुनाव प्रचार में भी सदर विधायक ने काफी मेहनत किया लेकिन भितरघातियों को सहेज पाने में पूरी तरह नाकाम रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी खलीलाबाद में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सभी भाजपाइयों को सहेजने का प्रयास किया था लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। यही हाल मगहर का भी रहा। बखिरा में भाजपा ने ऐसे ब्यक्ति को टिकट दे दिया जिससे नगर की जनता भी परिचित नहीं थी।

लोग बेहतरीन और लोकप्रिय दावेदारों को दरकिनार कर गुमनाम चेहरे पर दांव लगाना ही पराजय के लिए जिम्मेदार मान रहे हैं। मेंहदावल क्षेत्र की नगर पंचायत मेंहदावल, धर्मसिंहवा और बेलहर में भी भाजपाई प्रत्याशियों की पराजय के पीछे टिकट वितरण में गड़बड़ी और भाजपाइयों की गुटबाजी को ही जिम्मेदार माना जा रहा है। धनघटा विधानसभा क्षेत्र की  नगर पंचायत हरिहरपुर में टिकट की घोषणा के साथ ही विजय भी तय हो चुकी थी, कारण कि यहां से भाजपा प्रत्याशी रहे रविन्द्र प्रताप उर्फ पप्पू शाही का इस नगर पंचायत में एकछत्र राज चलता है। यहां की जनता केवल उन्हें ही अपना नेता मानती है। चेयरमैन पप्पू शाही नगर पंचायत को विकास के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिला चुके हैं।

इसके अलावा नव गठित नगर पंचायत हैंसरबाजार-धनघटा से भाजपा ने वरिष्ठ नेता नीलमणि की पत्नी श्रीमती रिंकू मणि को प्रत्याशी बनाया था। बड़े कद के नेता की पत्नी के चुनाव मैदान में होने के चलते जनता उनके साथ लामबंद हो गई। स्थानीय तमाम बड़े नेताओं ने यहां भी भाजपा प्रत्याशी को चुनाव हराने का हर सम्भव प्रयास किया। लेकिन आम मतदाताओं को बरगला पाने में भितरघातियों को सफलता नहीं मिली और रिंकू मणि बड़े अंतर से चुनाव जीत गईं। अब जबकि लोकसभा चुनाव बेहद करीब है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की सभी 80 सीटों पर विजय प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया है, तो जनपद संतकबीरनगर में ब्याप्त गुटबाजी उनके लक्ष्य में सेंध लगा सकती है। यहां के वर्तमान सांसद गाहे बगाहे ही नजर आते हैं। कार्यकाल के चार साल से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी लोकसभा क्षेत्र की जनता उन्हें अच्छी तरह से पहचान भी नहीं पाती। ऐसे में अगर लोकसभा चुनाव में इं. प्रवीण निषाद ही भाजपा की तरफ से रिपीट किए गए और जिले में ब्याप्त गुटबाजी को थामने का ठोस इंतजाम नहीं किया गया तो 2024 की डगर भाजपा के लिए बहुत कठिन साबित हो सकती है।

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